मन की बात : हमें प्रकृति का संरक्षक बनना होगा – PM मोदी

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दिल्ली : कई जगहों पर बारिश का कहर और कई जगहों पर बारिश का इंतजार। थाईलैंड की गुफा में फंसे बच्चों का जिक्र करते हुए मोदी ने प्रकृति के साथ मानव के संघर्ष की बात को उजागर किया।

उन्होंने कहा कि हमें प्रकृति का संरक्षक बनना होगा। यह मन की बात का 46वां संस्करण है।

मनुष्यों ने प्रकृति के साथ संघर्ष का रास्ता खोज लिया है। मगर, प्रकृति बीच-बीच में अपनी ताकत का एहसास कराती रहती है।

मोदी ने कहा कि थाईलैंड में 12 किशोर फुटबॉल खिलाड़ियों की टीम और उनके कोच घूमने के लिए गुफा में गए थे। अचानक भारी बारिश के कारण गुफा में पानी जम गया, जिससे उनके बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया।

कोई रास्ता न मिलने के कारण वे एक छोटे से टीले पर 18 दिन तक फंसे रहे। आप कल्पना कर सकते हैं किशोर अवस्था में सामने जब मौत दिखती हो और पल-पल गुजारनी पड़ती हो, तो वो पल कैसे होंगे? एक तरफ वो संकट से जूझ रहे थे, तो दूसरी तरफ पूरे विश्व में मानवता एकजुट होकर के ईश्वरदत्त मानवीय गुणों को प्रकट कर रही थी।

दुनिया भर में लोग इन बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रार्थनाएं कर रहे थे। यह पता लगाने का हर-संभव प्रयास किया गया कि बच्चे कहां और किस हालत में हैं। उन्हें कैसे बाहर निकाला जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब अच्छी खबर आई तो दुनिया भर को शान्ति हुई, संतोष हुआ, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में हर स्तर पर जिम्मेवारी का जो अहसास हुआ वो अद्भुत था।

इस दौरान मोदी ने कवि नीरज को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि नीरज की कविता में आशा की झलक दिखती है।

मध्य प्रदेश के छात्र आशाराम से लेकर अहमदाबाद की बेटी आमरीन शेख के दृढ़ संकल्प और आशा की कहानी साझा की। आशाराम बेहद गरीब परिवार से आते हैं और उन्होंने पहली बार में एम्स की परीक्षा पास की है। उनके पिता कचरा बीनने वाले हैं। मोदी ने कहा कि मैं उनकी सफलता के लिए उन्हें बधाई देता हूं।

पीएम मोदी ने कहा कि अनेक छात्रों ने जो गरीब परिवार से हैं, विपरीत परिस्थियों के बाद भी अपनी मेहनत और लगन से कुछ ऐसा कर दिखाया है, जो हमें प्रेरणा देता है। चाहे वो दिल्ली के प्रिंस कुमार हों, जिनके पिता डीटीसी में बस चालक हैं या फिर कोलकाता के अभय गुप्ता, जिन्होंने सड़क की रोशनी के नीचे पढ़ाई की।

देश के किसी भी कोने में होने वाली कोई भी अच्छी घटना मेरे मन को ऊर्जा देती है, प्रेरणा देती है और जब इन नौजवानों की कथा आपको कह रहा हूं, तो इसके साथ मुझे कवि नीरज जी की बात याद आती है।

पिछले दिनों मैंने एक न्यूज़ पढ़ी – ‘दो युवाओं ने किया मोदी का सपना साकार’। पढ़ा तो जाना कि आज हमारे युवा टेक्नोलॉजी का स्मार्ट उपयोग करके सामान्य व्यक्ति के जीवन में बदलाव का प्रयास कर रहे हैं।

दूसरों के जीवन में बदलाव के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका उदाहरण देने के लिए उन्होंने रायबरेली के दो युवाओं योगोश साहू और रजनीश बाजपेई का नाम लिया। जिन्होंने गांव की बेहतरी के लिए स्मार्ट गांव ऐप बनाया है। यह ऐप गांव के लोगों को पूरी दुनिया से जोड़ रहा है और लोग कोई भी जानकारी हासिल कर रहे हैं।

कोल्हापुर महाराष्ट्र से संतोष काकड़े ने पंढरपुर यात्रा के बारे में पूछा, तो पीएम मोदी ने पूरी जानकारी दी। इसके साथ ही महाराष्ट्र की कई महान हस्तियों का जिक्र किया।

मोदी ने कहा कि आषाढ़ी एकादशी जो इस बार 23 जुलाई, को थी उस दिन को पंढरपुर वारी की भव्य परिणिति के रूप में भी मनाया जाता है। पंढरपुर महाराष्ट्र के सोलापुर जिले का एक पवित्र शहर है। आषाढ़ी एकादशी के लगभग 15-20 दिन पहले से ही तीर्थयात्री पालकियों के साथ पंढरपुर की यात्रा के लिए पैदल निकलते हैं।

संत ज्ञानेश्वर और संत तुकाराम जैसे महान संतों की पादुका, पालकी में रखकर विट्ठल-विट्ठल गाते, नाचते, बजाते यात्री पैदल पंढरपुर की ओर चल पड़ते हैं। यह वारी शिक्षा, संस्कार और श्रद्धा की त्रिवेणी है।

पीएम मोदी ने 23 जुलाई को लोकमान्य तिलक की जन्मतिथि और एक अगस्त को उनकी पुण्य तिथि पर उन्हें याद किया। तिलक की महानता के बारे में बताते हुए कहा कि वह अंग्रेजों के आगे झुके नहीं। तिलक ने लोगों के जेहन में गहरी छाप छोड़ी है।