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मोदी की “रामलीला” से “धरना मास्टर” को डर

kejriwal-modiचुनाव आयोग ने दिल्ली चुनाव को लेकर लग रही तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए 7 फरवरी को दिल्ली में चुनाव कराने की घोषणा की और वहीं 10 फरवरी को नतीजें भी सबके सामने होंगे.इसी बीच देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर चुनावी सरगर्मी बढ़ गई है.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामलीला मैदान में रैली कर दिल्ली चुनाव के लिए शंखनाद कर दिया. दिल्ली का रामलीला मैदान फिर एकबार जनता की भीड़ से पट गया.नरेंद्र मोदी इस रैली के माध्यम से दिल्ली में होने वाले चुनाव के लिए पार्टी की तरफ से शक्तिप्रदर्शन के साथ दिल्ली की जनता के सामने अपने सरकार के नीतियों तथा अपने सरकार की तमाम योजनाओं के माध्यम से दिल्ली की जनता के दिल को जीतने की कवायद शुरू कर दी.ये रैली बीजेपी तथा नरेंद्र मोदी दोनों के निशाने पर अपरोक्ष रूप से आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविन्द केजरीवाल रहे. ये रैली बीजेपी के नजरिये से सफल रही.लेकिन,कहीं न कहीं बीजेपी को आम आदमी की लोकप्रियता का डर सता रहा है.

इस विधानसभा चुनाव में एक राष्ट्रीय पार्टी और दिल्ली की सल्तनत में सबसे ज्यादा हुकुमत करने वाली कांग्रेस इस चुनाव में हाशिए पर नजर आ रही है.दिल्ली से अरविन्दर सिंह लवली के नेतृत्व वाली कांग्रेस संगठन दिल्ली में चुनाव से पहले ही पस्त नजर आ रही है.चुनाव आयोग विधानसभा चुनाव की तिथि की घोषणा करने से ठीक पहले बीजेपी की ये रैली अभी से दिल्ली की राजनीति को पूरी तरह से गरम कर दिया है .आम आदमी पार्टी भी पोस्टर बैनरों के द्वारा बीजेपी तथा मोदी पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रही है.बहरहाल, अगर बात इस रामलीला मैदान में हुए रैली की करें तो बीजेपी ने एकबार फिर वादों का पिटारा दिल्ली की जनता के सामने रखा, मोदी ने आमजनमानस की मुलभूत सुविधाओं पानी, बिजली और मकान सभी को देने का वादा किया.जाहिर है कि दिल्ली में बिजली और पानी की समस्या इन दिनों सबसे बड़ी समस्या है. बिजली के लगातार बढ़ते बिल से दिल्ली की जनता त्रस्त है,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिजली की समस्या का निदान करने के वादा किया तथा इसके साथ बेघरों को घर देने की भी बात की.इन सभी बातो के बीच कई सवाल पैदा होते है पहला सवाल आखिर बीजेपी को शक्तिप्रदर्शन की जरूरत क्यों पड़ी ?तथा दूसरा सवाल क्या वाकई दिल्ली की जनता का दिल जीत पाएंगे मोदी? तथा तीसरा सवाल क्या बीजेपी तथा मोदी का विजयरथ केजरीवाल दिल्ली में रोक सकते है ?

अगर पहले सवाल की तह में जाए तो बीजेपी ये जानती है की पूरे देश की जनता की निगाहें मोदी पर टिकी है और बीजेपी पूरी तरह से मोदी की जादू की उम्मीद लगाए बैठी है, गौरतलब है कि हाल ही में सम्पन्न हुए झारखंड और जम्मू कश्मीर के चुनाव पर जरा गौर करे तो बीजेपी को यह एहसास तो गया है कि लोकसभा चुनाव के मुकाबले पार्टी का प्रदर्शन कुछ कमतर रहा है.लोकसभा चुनाव में मोदी तथा बीजेपी को एकतरफा जनादेश मिला था,समय के साथ –साथ उसमें कमी आई है.विगत लोकसभा चुनावों में बीजेपी को इस राज्य में तकरीबन 60 सीटों पर बढत हासिल हुई थी, जो सिमट कर लगभग 40 सीटों तक रह गई है.इसमें बीस सीटों का नुकसान इस बात की ओर इशारा करता है कि मोदी का जादू धीरे-धीरे फीका पड़ रहा है,जिसका असर दिल्ली में होने वाले चुनाव पर दिख सकता था इसलिए मोदी तथा बीजेपी ने इस रैली का आयोजन किया।

दुसरे सवाल पर गौर करें तो यहाँ मामला बड़ा पेचीदा है,एकतरफ मोदी दिल्ली में रहकर ही दिल्ली में बीजेपी की सरकार बनाने के लिए तैयारी कर रहे है.मोदी ने अपने भाषण के दौरान कई वादों का पिटारा खोला जिसमें दिल्ली की जनता को भ्रष्टाचार, महंगाई, बिजली पानी.घर तथा सभी जनता से जुड़े उस मुद्दे को छुआ तथा इस समस्याओं को दूर करने का वादा भी किया.परन्तु मोदी के लिए दिल्ली की जनता का दिल जितना इतना आसान नहीं होगा, बिजली के दाम बढ़े है, रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं, हालाकि मोदी सरकार महंगाई कम होने का दावा तो कर रही है लेकिन धरातल पर इसका कोई बहुत असर नहीं दिख रहा है, मोदी ने भाषण के दौरान बिजली के लिए कंपनियों को मोबाईल कम्पनीयों की तरह चुनने के लिए एक नई नीति का जिक्र तो किया लेकिन अभी ये कैसे होगा कबतक होगा इसका कोई जिक्र नहीं किया.मोदी ने जनधन योजना, आदर्श ग्राम योजना व सभी योजनाओं के द्वारा हुए लाभों को दिल्ली की जनता के सामने रखा साथ ही मोदी ने हरियाणा सरकार से चल रहे यमुना जल विवाद को सुलझाने का वादा दिल्लीवासियों से किया और घर –घर तक पानी पहुँचाने का वादा किया.अब तो वक्त ही बतायेगा की इन वादों के जरिये मोदी दिल्लीवासियों का दिल जीत पातें है या नही.

एक सवाल बीजेपी तथा मोदी दोनों के लिए अपनी शाख को बचाने का सवाल भी है. लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी का विजय रथ अभी तक अपना विजयी परचम लहरा रही है,पार्टी लगातार सभी चुनावों में विजयी हो रही है.ऐसे में दिल्ली में केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी बीजेपी के लिए दिल्ली चुनाव में एक बड़ी चुनौती से कम नहीं है.इस बात को बीजेपी व मोदी भलीभांति जानते है,इस रैली में बीजेपी के सभी आला नेताओं के निशाने पर आम आदमी पार्टी ही रही,गौरतलब है कि मोदी ने भी अपने 47 मिनट के भाषण में लगभग 8 मिनट तक सांकेतिक रूप से केजरीवाल को निशाने पर लिया ,मोदी ने केजरीवाल को ‘धरना मास्टर’ बताया और दिल्ली की जनता से एक स्थिर सरकार चुनने का आग्रह किया, विगत विधानसभा चुनाव की बात करें तो दिल्ली में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला. बीजेपी को सबसे ज्यादा लेकिन बहुमत से दूर 32 सीटों पर संतोष करना पड़ा तो वही दिल्ली तथा देश की राजनीति में नई पार्टी आम आदमी पार्टी को 28 सीटें मिली जो सभी राजनीतिक दलों के साथ साथ सभी राजनीतिक विशलेषकों को भी चौका दिया.वहीँ कांग्रेस मात्र 8 सीटों पर सिमट गई.कांग्रेस के समर्थन की आम आदमी पार्टी की सरकार 49 दिनों में लोकपाल के मुद्दे पर गिर गई और मुख्यमंत्री केजरीवाल को अपना इस्तीफा देना पड़ा.अगले माह होने वाले चुनाव में भी केजरीवाल की लोकप्रियता को नकारा नहीं जा सकता.परन्तु बीजेपी केजरीवाल पर आक्रमक रुख अपनाएं हुए है,जाहिर है कि लोकपाल के लिए नाटकीय ढंग से दिल्ली की सत्ता छोड़ने वाले केजरीवाल इस चुनाव में लोकपाल को गौण कर अपने 49 दिनों की सरकार चलाने के दम पर जनता से वोट मांग रहे है.वहीँ दूसरी तरफ मोदी अपने 7 महीने के सरकार के कामकाज के दम पर जनता से वोट मांग रहे है.इस रैली के मध्यम से मोदी ने मोर्चा तो संभाल लिया है और दिल्ली में बीजेपी को मिल रहे अपार जनसमर्थन के बावजूद केजरीवाल बीजेपी के लिए एक बड़ी चुनौती है.
:- आदर्श तिवारी

Adarsh Tiwariलेखक :- आदर्श तिवारी (स्वतंत्र टिप्पणीकार )

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल

के विस्तार परिसर “कर्मवीर विद्यापीठ” में जनसंचार के छात्र है ।
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