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‘जनसुनवाई’ के इस नियम से अनजान कलेक्टर्स या लापरवाही !

madhya pradeshभोपाल- राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल ‘जनसुनवाई’ के मामले में कलेक्टरों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। पिछले करीब सात साल से कलेक्टरों ने प्रभारी मंत्रियों को मासिक रिपोर्ट नहीं दी है। वहीं मंत्रियों को मासिक रिपोर्ट भेजने को लेकर किसी प्रकार के दिशा निर्देश होने की जानकारी नहीं है। रिपोर्ट नहीं मिलने से प्रभारी मंत्री जनसुनवाई की समीक्षा भी नहीं कर रहे हैं।

क्या हैं निर्देश: 30 जून 2009 में जनसुवाई शुरू हुई थी। तत्कालीन सचिव प्रदीप खरे ने 26 अगस्त 2009 को निर्देश जारी किए कि कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में प्राप्त होने वाली शिकायतों एवं उनके निराकरण की सूची अगले माह की 10 तारीख तक जिले के प्रभारी मंत्री को ई-मेल से अनिवार्य रूप से भेजें। इसके अलावा जीएडी ने सभी कलेक्टरों को एक और पत्र 20 अप्रैल 2016 को भेजते हुए प्रभारी मंत्रियों को जनसुनवाई की जानकारी उपलब्ध कराने का दबाव बनाया है। जीएडी ने सभी कलेक्टरों से एक प्रति विभाग को भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिये हैं।

और ये हैं ‘सरकार’ के हाल

कोई प्रावधान नहीं
कलेक्टरों ने जनसुनवाई की जानकारी नहीं दी। हमने खुद ही मांगी है। जानकारी भेजने का प्रावधान भी नहीं है।
मंत्री उमाशंकर गुप्ता उच्च शिक्षा मंत्री

आदेश बताओ
रतलाम, शाजापुर, खंडवा के कलेक्टरों ने कभी जानकारी नहीं दी है। अगर कोई निर्देश हैं तो बताओ मैं कलेक्टरों से मांगूगा।
पारस जैन मंत्री
स्कूल शिक्षा

व्यवस्था नहीं
अभी कोई व्यवस्था नहीं है। हम मांगते हैं तभी मिलती है। प्रभार वाले जिलों के कलेक्टरों ने हमें कभी जानकारी नहीं भेजी है।
सुरेंद्र पटवा
संस्कृति राज्यमंत्री

कलेक्टर प्रभारी मंत्रियों को हर माह जानकारी उपलब्ध करायें, ऐसे कोई निर्देश नहीं हैं। आपने बताया है तो पीएस से कन्फर्म कर कुछ बोल सकता हूं।
लाल सिंह आर्य राज्य मंत्री सामान्य प्रशासन

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