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एमपी: एक सरपंच की ईमानदारी या किसान की बदहाली ?

Mandla Formersमंडला- सरपंच-सचिव के भ्रष्टाचार और घोटालों की ख़बरें तो आप ने बहुत देखी और सुनी होंगी। सामान्य रूप से सरपंच बनते ही लोगों के रेहन – सहन और चाल – ढाल बदल जाती है। सरपंच बनना लोगों के लिए वरदान बन जाता है। क्या सरपंच बनना किसी के लिए अभिशाप भी बन सकता है ? नहीं न तो आइये आज हम आपको ऐसे ही सरपंच से मिलाते है जो ईमानदारी की मिसाल है। जिसके पास न तो एक इंच जमीन है और न रहने के लिये कोई मकान है। हैरत की बात तो यह है कि आजीविका चलाने के लिये यह सरपंच दूसरे के खेतों में मजदूरी का काम करता है। जनप्रतिनिधि होने के कारण सरपंच और उसके परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ भी नही मिल पा रहा है।

आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले के पीपरपानी ग्रामपंचायत के अघन सिंह को सरपंच बनना अभिशाप साबित होते नजर आ रहा है। अघन सिंह न सिर्फ मध्यप्रदेश बल्कि देश का शायद पहला सरपंच होगा जिसके पास न तो एक इंच जमीन है और न रहने के लिये कोई मकान है। दूसरे के खेतों में हल जोतकर अपने परिवार का भरण पोषण करने वाला मजदूर अघन सिंह कहने को तो पीपरपानी ग्रामपंचायत का सरपंच है लेकिन इसकी माली हालत इतनी खराब है कि यह अपनी बीमार पत्नी का इलाज भी नहीं करा पा रहा है। अजब एमपी के इस गजब सरपंच ने जिलाप्रशासन से मदद के लिये अनेकों बार गुहार भी लगाई है लेकिन जनप्रतिनिधि का हवाला देकर इसे सरकारी योजनाओं का लाभ नही दिया जा रहा है।

अंततः ग्रामीणों की सर्वसम्मति से सरपंच और उसके परिवार को बरसात के दिनों सामुदायिक भवन में शरण दी गई है। ग्रामीणों की मानें तो उनके गांव में जब से अघन सिंह सरपंच बना है तबसे गांव में अनेकों विकास कार्य हुये हैं। अपनी ईमानदारी और कार्यकुशलता के चलते सरपंच ने गांव की तस्वीर बदल कर रख दी है लेकिन सरपंच के खुद का हाल बेहाल है।

पंचायत के सामुदायिक भवन में सरपंच और उसके परिवार ने डेरा डाल दिया है। पंचायत सचिव संतोष ठाकुर की मानें तो ग्रामीणों की सर्व सम्मति से सरपंच की हालत देखकर यह फैसला लिया गया है साथ ही सचिव बताते हैं कि उन्होंने ऐसा सरपंच पहली बार देखा है जिसकी हालत इतनी दयनीय है। जनप्रतिनिधि होने के कारण सरपंच और उसके परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ भी नही मिल पा रहा है। सचिव का कहना है इन्हे इंदिरा आवास का लाभ जनप्रतिनिधि होने के नाते नहीं मिल पा रहा है।

मुख्य मंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत इन्हे आवास तो मिल सकता है लेकिन इसके लिए खुद की ज़मीन होना जरुरी है लेकिन इनके कास खुद की कोई ज़मीन न होने से इस योजना के लाभ से भी ये वंचित है। वहीं जिला पंचायत के उपाध्यक्ष शैलेष मिश्रा पीपरपानी के सरपंच की ईमानदारी के कसीदे पढ़ते नहीं थक रहे हैं। लेकिन मदद की जगह वो केवल आश्वासन ही दे रहे है।

अघन सिंह के पहले उनकी पत्नी सरपंच थी, उनका बेहतरीन काम को देखते हुए अघन सिंह को ग्रामीणों ने सरपंच चुना। ग्राम पंचायत के लोग सरपंच और अब उसकी पांच पत्नी के काम से बहुत खुश है। सरपंच के गाँव के विकास की नै इबारत लिखी है। गाँव में विकास की बयार बहाने वाले इस सरपंच को इन्तिज़ार है खुद के विकास का। सरपंच की तारीफ करने वालों की तो कोई कमी नहीं है लेकिन सरपंच को जरुरत है मदद की जो उनसे कोंसो दूर नज़र आती है।

रिपोर्ट- @सैयद जावेद अली
एमपी: एक सरपंच की ईमानदारी या किसान की बदहाली ?
MP: Example of Honesty or plight of farmers story

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