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वैलेंटाइन डे: महिला आयोग की अध्यक्ष ने क्यों कहा, होना चाहिए फांसी

खंडवा : राज्य महिला आयोग की संयुक्त बैंच ने खंडवा में सुनवाई की इस दौरान महिला आयोग की अध्यक्ष लता वानखेडे़ महिलाओं से जुड़े मामलों में सख्त करवाई करने के निर्देश भी दिए। श्रीमती वानखेडे़ ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के उस बयान का समर्थन किया जिसमें मुख्यमंत्री ने दुष्कर्म करने वालों को फांसी की सज़ा मिलने की बात कही थी।

राज्य महिला आयोग की संयुक्त बैंच ने आज खंडवा में महिलाओं से जुड़े मामलो पर सुनवाई की। इस दौरान घरेलु हिंसा , सरकारी सहायता और छेड़छड़ जैसे मामलो पर महिला आयोग की अध्यक्ष लता वानखेडे़ सख्त नजर आई। राज्य महिला आयोग की सुनवाई में 49 मामले शामिल किए गए ,जिसमे से 17 मामलों पर आज सुनवाई की गई। 13 मामलों में समझाइस दी गई वहीँ बाकि मामलों में विशेष जाँच के निर्देश दिए। श्रीमती वानखेडे़ ने कहा कि जो लोग महिलाओं के साथ अपराध करते है वो मानसिक रूप से विकृत होते है। उन्होंने प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह के बयान का भी खुल कर समर्थन करते हुए कहा कि दुष्कर्म करने वालों को फांसी की ही सज़ा होनी चाहिए।

सुनवाई के दौरान ही हरसूद की एक महिला अपने साथ हो रही छेड़छाड़ की शिकायत लेकर महिला आयोग की बैंच पहुँची महिला का कहना था की उसके साथ गांव का ही एक व्यक्ति फोन पर अश्लील बातें कर के पति को जान से मारने और बच्चे का अपहरण करने की धमकी दे रहा है। महिला आयोग की अध्यक्ष लता वानखेडे़ ने पीड़ित की मदद के लिए हरसूद थाने के निरक्षक को तुरंत एफ आई आर करने के निर्देश दिए। पीड़ित महिला अपने पति के साथ सुनवाई में पहुँची थी।

श्रीमती वानखेड़े द्वारा कविता मिश्रा सहायक प्रबंधक (तक.) इंदिरा सागर द्वारा वी.के.राय क्षेत्रीय प्रबंधक के विरूद्ध की गई शिकायत के प्रकरण की सुनवाई करते हुए उसका निराकरण किया। साथ ही कहा कि जो अपराधी होता है वह सजा का हकदार होता है, उसे सजा मिलनी चाहिए। सरकार अपना प्रयास कर रही है समाज को भी आगे आना चाहिए। मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती गंगा उईके , श्रीमती सूर्या चौहान, जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी श्रीमती हेमलता सोलंकी एवं महिला सेल के प्रभारी श्री ए.एस. वास्कले भी मौजूद थे।

छात्रावास का किया औचक निरीक्षण
इसके साथ ही मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की संयुक्त बैंच द्वारा उत्कृष्ट आदिवासी कन्या छात्रावास का औचक निरीक्षण भी किया तथा वहां की व्यवस्थाएं देखी। छात्रावास की बच्चियों से मुलाकात की और उनकी पढ़ाई आदि के बारे में जाना। साथ ही उन्हें पढ़ाई जारी रखने एवं आगे बढ़ने हेतु प्रेरित किया।






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