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मोदी राज में गाय के नाम पर ह‍िंसा में मर रहे मुसलमान

गोवंश से जुड़ी हिंसा के मामले केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार बनने के बाद बहुत तेजी से बढ़े हैं। डाटा वेबसाइट इंडिया स्पेंड की रिपोर्ट के अनुसार साल 2010 से 2017 के बीच गोवंश को लेकर हुई हिंसा में 57 प्रतिशत पीड़ित मुसलमान थे। इस दौरान गोवंश से जुड़ी हिंसा में मारे जाने वालों में 86 प्रतिशत मुसलमान थे। इन आठ सालों में ऐसी 63 घटनाएं हुई जिनमें 28 भारतीयों की जान चली गई। गोवंश से जुड़ी हिंसा के 97 प्रतिशत मामले केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद हुए हैं। नरेंद्र मोदी ने मई 2014 में केंद्र की सत्ता संभाली थी। इंडिया स्पेंड ने 25 जून 2017 तक के आंकड़ों के आधार पर ये विश्लेषण किया है।

इस दौरान गोवंश से जुड़ी हिंसा के मामलों में मारे गए 28 लोगों में से 24 मुसलमान (करीब 86 प्रतिशत) थे। इन घटनाओं में 124 लोग घायल हुए थे। गाय से जुड़ी हिंसा के आधे से ज्यादा मामले (करीब 52 प्रतिशत) झूठी अफवाहों की वजह से हुए थे। रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले अपराध से जुड़े आकंडो़ं में गोवंश या भीड़ द्वारा की गई हिंसा और हत्या के मामले अलग से नहीं दर्शाए जाते। गाय से जुड़ी हिंसा के 63 मामलों में 32 बीजेपी शासित प्रदेशों में दर्ज किए गए। आठ मामले कांग्रेस शासित प्रदेशों में हुए। बाकी मामले दूसरी पार्टियों द्वारा शासित प्रदेशों में हुए।

इंडिया स्पेंड की रिपोर्ट के अनुसार साल 2017 में गाय से जुड़ी हिंसा के मामलों में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। इस साल से पहले छह महीनों में गाय से जुड़े 20 मामले हुए जो साल 2016 में हुई कुल हिंसा के दो-तिहाई से ज्यादा हैं। साल 2010 से इस साल तक सबसे ज्यादा गोवंश से जुड़ी हिंसा साल 2016 में हुई थी। इन मामलों में भीड़ द्वारा हमला करने, गौरक्षकों द्वारा हमला करने, हत्या, हत्या की कोशिश उत्पीड़न, सामूहिक बलात्कार इत्यादि के मामले शामिल हैं। दो मामलों में पीड़ितों को जंजीर से बांधकर नंगा करके घुमाया और पीटा गया था। दो मामलों में पीड़ितों को फांसी से लटका दिया गया था।

गोवंश से जुड़ी हिंसा के सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश (10) में दर्ज किए गए। उसके बाद हरियाणा (9), गुजरात (6), कर्नाटक (6), मध्य प्रदेश (4), दिल्ली (4) और राजस्थान (4) में दर्ज किए गए। इनमें से 21 प्रतिशत मामले ही दक्षिण या पूर्वी भारत (बंगाल और ओडिशा समेत) में दर्ज किए गए। पूर्वोत्तर भारत में इस दौरान गोवंश से जुड़ी हिंसा का केवल एक मामला दर्ज हुआ। 30 अप्रैल 2017 को असम में दो लोगों की गोवंश को लेकर हुए विवाद में हत्या कर दी गई थी।

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