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जनहित में नर्मदा जल का अनुबंध निरस्त करे महापौर

narmada-jal-khandwaखंडवा – भारतीय जनता पार्टी के खंडवा नगर निगम के महापौर द्वारा तत्कालीन भाजपा महापौर श्रीमती भावना शाह की एमआईसी द्वारा स्वीकृत किए गए तीन करोड़ के काम निरस्त किए गए। यह निर्णय महापौर सुभाष कोठारी द्वारा जनहित में है या बदले की भावना से लिए गए हैं यह तो स्वयं सुभाष कोठारी जाने। लेकिन यह निर्णय पार्टी की अनुशासनहीनता की श्रेणी में जरूर आता है क्योंकि पूर्व में भारतीय जनता पार्टी की परिषद द्वारा ही यह निर्णय लिया गया था कि शहर में तीन करोड़ के विकास कार्य किए जाएंगे। अगर भारतीय जनता पार्टी के महापौर सुभाष कोठारी को निर्णय ही लेना था तो जनहित में नर्मदा जल योजना में जो अनुबंध किया गया है उसे निरस्त कर स्वतंत्र एजेंसी से उसमें हुई गड़बडिय़ों की जांच कराते तो ज्यादा अच्छा होता न कि तालाब में मछली मारने के बजाय मगरमच्छों का शिकार करें।

पूर्व एल्डरमेन जगन्नाथ माने ने महापौर सुभाष कोठारी पर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछली परिषद के तीन करोड़ के काम आपके द्वारा जनहित में निरस्त किए गए हैं तो नर्मदा जल के अनुबंध को निरस्त कराए अन्यथा आपके द्वारा वर्तमान में जो निर्णय लिया गया है इससे यह प्रतीत होता है कि आप शहर के विकास में कम और बदले की भावना रखते हुए कार्य कर रहे हैं और वहीं दूसरी ओर चूंकि पिछली परिषद भी भाजपा की थी, वर्तमान परिषद भी भाजपा की है इसलिए पूर्व में स्वीकृत कार्यो को निरस्त करना जिससे जनता में यह संदेश जाता है कि महापौर सुभाष कोठारी शहर के विकास को पीछे धकेल कर अपनी मनमानी पर उतर आए हैं और यह कृत्य अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।

अगर वास्तव में महापौर को लग रहा है कि पिछली परिषद द्वारा लिए गए निर्णय अनुचित है तो खंडवा महापौर से मेरा आग्रह है कि पिछली परिषद द्वारा लिए गए अनेक निर्णय ऐसे हैं जिसमें नर्मदा जल योजना, खंडवा शहर के लिए बनाई गई सीवरेज के लिए डीपीआर एवं बुलाई गई निविदा के साथ-साथ एसएन कालेज के सामने का हाकर्स झोन, फ्लैक्स पर कितने रूपयों का व्यय हुआ इत्यादि में भी अनियमितताएं पिछली परिषद द्वारा की गई है। इसलिए श्री माने ने खंडवा महापौर से मांग की है कि अगर आप वास्तव में नगर निगम से भ्रष्टाचार को समाप्त करना चाहते हैं तो पिछली परिषद द्वारा लिए गए समस्त निर्णयों की एक स्वतंत्र एजेंसी बनाकर शासन से इसकी जांच करवाए ताकि पिछली परिषद द्वारा जितने भी निर्णय लिए गए हैं वो निर्णय नियमानुसार है या नहीं इसका खुलासा स्वयं हो जाएगा।

लेकिन तीन करोड़ के कार्य निरस्त कर अपने चहेते ठेकेदारों को देने की अगर कोई योजना है तो जनहित एवं शहरहित में नहीं होगा। श्री माने ने मप्र के मुख्यमंत्री एवं प्रदेश के प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमारसिंह चौहान को भी पत्र लिखकर मांग की है कि खंडवा नगर निगम के महापौर सुभाष कोठारी को सलाह दे कि आप शहर हित एवं जनहित में कार्य करें न कि बदले की भावना से।

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