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भारत माता की जय के साथ दरगाह पर फहराया तिरंगा

Maharashtra Dargah Maahimमुंबई- मुंबई की मशहूर माहिम दरगाह परिसर में तिरंगा झंडा फहराया गया और बड़ी संख्या में यहां इकट्ठा हुए मुस्लिम समाज के लोगों ने के नारे भी लगाए। ज्ञात हो कि एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भारत माता की जय न कहने का विवादित बयान दिया था ! इसी तरह महाराष्ट्र के ओवैसी की पार्टी के ही विधायक वारिस पठान को भी लोकसभा से निलंबित कर दिया गया था !

देश में जहां एक तरफ भारत माता की जय बोलने को लेकर उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा, वहीं देश के आम लोग ऐसी मिसाल कायम कर रहे जिससे इस तरह की राजनीति करने वाले नेताओं का मुंह बंद किया जा सके। एेसी पहल में देश के मुस्लिम तबके ने एक उदाहरण पेश की है। मुंबई की मशहूर माहिम दरगाह परिसर में गुरुवार को न सिर्फ तिरंगा झंडा फहराया गया बल्कि बड़ी संख्या में यहां इकट्ठा हुए मुस्लिम समाज के लोगों ने राष्ट्रगान के साथ भारत माता की जय के नारे भी लगाए।

माहिम स्थित पीर मकदूम शाह बाबा की दरगाह दुनिया भर में माहिम दरगाह के नाम से मशहूर है। इस दरगाह के 603वें उर्स के मौके पर मुस्लिम समाज के लोगों ने देश में पहली बार किसी दरगाह के भीतर तिरंगा फहराया और भारत माता की जय के नारे लगाए। दरगाह के ट्रस्टियों के अनुसार आतंकी संगठन आइएस का खतरा हमारी दहलीज पर दस्तक दे रहा है। ऐसे में देश के नौजवान देश की चंद घातक शक्तियों के षड्यंत्र का शिकार न बनें। इसलिए पीर मकदूम शाह बाबा के शांति और प्रेम के संदेश को देशभर में फैलाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि इसी मकसद से माहिम दरगाह के नाम से पहले ही एक ऐप जारी किया गया है।

इसके जरिए मुस्लिम युवकों को इस्लाम और उसके अर्थ का मार्गदर्शन किया जाता है। गुरुवार शाम जब माहिम दरगाह परिसर में तिरंगा फहराया गया और भारत माता की जय के नारे लगे, तब शिवसेना सांसद राहुल शेवाले, मशहूर वकील रिजवान मचेर्ट, डॉ. मुदस्सर लांबे, शिवसेना के उप नेता हाजी अरफात शेख जैसे कई मुस्लिम समाज के गणमान्य लोग उपस्थित थे। शेख ने बताया कि दरगाह में तिरंगा फहराए जाने के वक्त पुलिस बैंड का बिगुल बजाकर सलामी दी गई।

उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के जरिए मुुस्लिम समाज के लोगों ने ओवैसी और देशद्रोही नेताओं को देशभक्ति दिखाकर करारा जवाब दिया है। इस्लाम की जानकार झीनत अली ने कहा कि भारत जैसे बहुरंगी और बहुभाषी देश में सांप्रदायिक सौहार्द बनाये रखने के लिए इस प्रकार के कार्यक्रमों की बहुत अधिक जरूरत है।

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