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नेशनल शूटर आयशा पलक गोली चलाकर क्यों है सुर्खियों में

नई दिल्ली : राष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज आयशा पलक अपने एक काम की वजह से सुर्खियों में हैं। आयशा ने अपने साहस का परिचय देते हुए अपहरणकर्ताओं को गोली मारकर अपने रिश्ते के भाई को उनके चंगुल से छुड़ाया। उनका भाई आसिफ दिल्ली यूनिवर्सिटी का छात्र है। कुछ बदमाशों ने उनका अपहरण कर लिया था।

गुरुवार की रात अपहरणकर्ताओं ने फिरौती की कॉल की थी और एक तय जगह पर रकम पहुंचाने को कहा था। जब सफेद रंग की इंडिका स्विफ्ट डिजायर के पास पहुंची, तो अंदर बैठे दो बदमाशों मोहम्मद रफी और आकाश ने कार की खिड़की से हाथ बढ़ाकर फिरौती की रकम ले ली।

यहां से वे शास्त्री पार्क से भजनपुरा पहुंचे। इंडिका का दरवाजा खुलते ही एक युवक बाहर निकला, दोनों पार्टियों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और आसिफ को छोड़ दिया। इससे पहले कि किसी को कुछ समझ आता, अचानक गोली चलने की आवाज आई।

गोली 33 साल की आयशा फलक ने चलाई थी। उनके हाथ कांप रहे थे, पर इस राष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज और कोच ने एक बदमाश की कमर पर गोली मारी, तो दूसरे बदमाश के पैर पर भी गोली चलाई।

आयशा के पास लाइसेंसी पिस्टल है, जिसे वह हमेशा अपने पर्स में रखती हैं। उनके रिश्ते के भाई आसिफ को बदमाशों ने करीब 5 घंटे तक बंधक बनाकर रखा था। आयशा के पति फलक शेर आलम ने बताया, ‘फिरौती की कॉल आने के बाद आयशा डरी हुई थीं, लेकिन उन्होंने कहा कि वही आसिफ को अगवा करने वालों को पैसे हरगिज नहीं देंगी।

आयशा ने बताया, ‘मुझे पुरुषों पर फायरिंग करते देख आसिफ हैरान था, वह तुरंत मेरे पास भागता हुआ आया। वह डर के मारे कांप रहा था और मैं भी।’ आयशा और उनके पति की कार को पुलिस फॉलो कर रही थी। पुलिस ने आयशा की गोली से घायल हुए आरोपियों को पकड़ लिया।

आयशा की पिस्टल भी पुलिस ने अपने कब्जे में ले ली है। पूर्वी रेंज के जॉइंट कमिश्नर रवींद्र यादव ने कहा कि जांच की जा रही है कि आयशा ने आत्मरक्षा या आसिफ को बचाने के लिए गोली चलाई। अगर ऐसा साबित हो जाता है तो उन्हें कानूनी सुरक्षा मिलेगी।

आसिफ क्लास के बाद कैब ड्राइविंग कर जेब खर्च निकालता था। गुरुवार रात उसे दरियागंज से बुकिंग मिली, वह रफी और आकाश के पिक अप के लिए घर से निकल पड़ा। आधे रास्ते में उन दोनों ने अलग रूट लेने के लिए कहा। आसिफ ने बताया, ‘मैंने तुरंत कार रोक दी और आगे जाने से इनकार कर दिया।’ इसके बाद उसे आगे की पैसेंजर सीट पर धकेलकर जान से मारने की धमकी दी गई, वॉलिट छीन लिया गया। उसमें सिर्फ150 रुपये निकले। इसके बाद बदमाशों ने मेरी पिटाई की और परिवार को फोन करने के लिए कहा।

रात के 1 बजे आसिफ के फोन से कॉल आई और 25,000 रुपयों के साथ शास्त्री पार्क पहुंचने के लिए कहा गया। पहले परिजनों को लगा कि आसिफ कोई मजाक कर रहा है, लेकिन बाद में पीसीआर कॉल की गई। पुलिस ने पैसों के साथ वहां पहुंचने के लिए कहा। पुलिसवाले सादे कपड़ों में वहां पहुंचे। बदमाशों को शक था कि वहां पुलिस हो सकती है। आयशा के पति आलम कार के पीछे थे और पुलिस भी सिविल ड्रेस में कार को फॉलो कर रही थी। जैसे ही आयशा ने बदमाशों पर गोली चलाई, पुलिस मौके पर पहुंच गई और बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया।

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