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नई अफीम नीति मजबूत करेगी संसदीय क्षेत्र की अर्थव्यवस्था

mandshourनई दिल्ली/मंदसौर – नई अफीम नीति से संसदीय क्षैत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। बड़ी संख्या में पट्टे बहाल होने से किसानों के साथ-साथ समूची अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। करीब 66 हजार किसानों के साथ-साथ प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से साढ़े तीन से चार लाख लोग किसी ना किसी तरह से रोजगार प्राप्त करेंगे। यह नीति केन्द्र सरकार का दिपावली पर संसदीय क्षैत्र के किसानों को तोहफा है। मैं उन सभी किसानों को बधाई देता हूं, साथ ही किसान हित में इस लोकहितकारी नीति के लिए वित्त मंत्री श्री अरूण जेटली एवं वित्त राज्य मंत्री श्री संतोष गंगवार के प्रति आभार व्यक्त करता हूं। यह बात सांसद श्री सुधीर गुप्ता ने अपने निवास पर आयोजित एक पत्रकार वार्ता में कही।

जारी नीति की जानकारी देते हुए आपने बताया कि सांसदों से मंत्रणा एवं अधिकारियों से विचार-विमर्ष के बाद अफीम नीति को जारी किया गया है। हमारे द्वारा दिए गए सुझावों पर मंत्रालय ने अमल किया, जिसका परिणाम है कि बड़ी संख्या में पुराने पट्टे इस साल बहाल होंगें। आपने बताया कि

वे किसान जिन्होंने फसल वर्ष 2015-16 के दौरान अफीम पोस्त की खेती की थी और मध्यप्रदेष तथा राजस्थान राज्यों में औसत अफीम की उपज कम से कम 49 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर एवं उत्तरप्रदेष में 47 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की उपज सौंपी थी।

वे किसान जिन्होंने संबंधित प्रावधानों के अनुसार केन्द्रीय स्वापक ब्यूरो की देखरेख में फसल वर्ष 2013-14, 14-15 एवं 15-16 के दौरान अपनी संपूर्ण पोस्त की फसल की जुताई की हो, किन्तु जिन्होंने इसी तरह वर्ष 2012-13 के दौरान अपनी संपूर्ण पोस्त फसल की जुताई नहीं की।

किसान जिनकी लाइसेंस मंजूर ना करने के खिलाफ अपील को फसल वर्ष 2015-16 में निपटान की अंतिम तारीख के बाद अनुमति दे दी गई हो। किसान जिन्होंने फसल वर्ष 2013-14 अथवा किसी अगले वर्ष में पोस्त की खेती की हो और जो अनुवर्ती वर्ष में लाइसेंस के पात्र थे, किन्तु किसी कारणवष, स्वेच्छा से लाइसेंस प्राप्त ना किया हो अथवा जिन्होंने फसल वर्ष में लाइसेंस प्राप्त करने के बाद किसी कारणवष अफीम पोस्त की खेती वास्तव में ना की हो।

किसान जो दिवंगत किसानों के कानूनन वारिस हैं और यदि एक से अधिक ऐसे कानूनन वारिस हैं, तो उनमें से एक किसान जिसको लायसेंस के उद्देष्य से जिला अफीम अधिकारी द्वारा कानूनी वारिस निर्धारित किया जाए।

ऐसे किसान जिन्होंने फसल वर्ष 2015-16 के दौरान अफीम जमा करवाई है तथा फसल वर्ष 2015-16 सहित पिछले लगातार पांच वर्षों के संबंध में कुल न्यूनतम अर्हक उपज के 103 प्रतिषत के बराबर अथवा इससे अधिक कुल अफीम जमा करवाई है।

किसान जिन्होंने डिलाइसेंस होने से पूर्व 1997-98 के पष्चात न्यूनतम पांच वर्षों तक के लिए अफीम जमा करवाई हो।

दिनांक 22 जनवरी, 2016 की अधिसूचना संख्या1/2016 के उपवाक्य 2, 2क के अन्र्तगत आने वाले सभी पात्र किसानों को 20 आरी के लिए लाइसेंस दिया जाएगा। तथापि उपवाक्य 2क।। के अन्र्तगत आने वाले सभी पात्र किसानों को 12 आरी के लिए लाइसेंस दिया जाएगा।

नीति को अपर सचिव श्री टीके सत्पथी के हस्ताक्षर से जारी किया गया। पत्रकार वार्ता में जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री गुणवंत पाटीदार, जिला मंत्री श्री गणपतसिंह आंजना, मंडल अध्यक्ष नरेष चंदवानी, नरेन्द्र पाटीदार, सांसद प्रतिनिधि श्री तेजपालसिंह षक्तावत भी उपस्थित थे।

नई नीति किसानों को समर्पित

किसानों का आर्थिक उन्नयन हमारी मंषा रही है। नई नीति से किसान तो मजबूत होंगे ही, संसदीय क्षैत्र की अर्थव्यवस्था में भी उछाल आएगा। प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर लाखों लोग रोजगार प्राप्त करेंगें। यह नीति केन्द्र सरकार के किसान हितों के चिंतन को स्पष्ट करती है। मैं इस नीति को सभी किसानों एवं उनके परिश्रम को समर्पित करता हूं। पट्टे प्राप्त करने वाले किसान अपने श्रम से इसी तरह भारत देष की आर्थिक प्रगति का आधार बनते रहें, तो देष की उन्नति निष्चित है।
रिपोर्ट : प्रमोद जैन





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