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नाबालिग को सजा दिलाने वाला बिल पास क्यों नहीं हुआ?

 

Supreme Courtलखनऊ- देश के बहुचर्चित निर्भया बलात्कार कांड का मुख्य आरोपी 20 दिसम्बर को जेल से रिहा हो गया। इसके साथ ही दिल्ली में इंडिया गेट पर धरना प्रदर्शन शुरू हो गया है। निर्भया के माता-पिता भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हैं। इस आरोपी ने तीन वर्षपहले निर्भया के संग बलात्कार किया था। तब यह नाबालिग था।

इसी वजह से मात्र तीन वर्ष की सजा ही बलात्कारी को मिल पाई। बलात्कार के आरोपी को नाबालिग होने का लाभ न मिले इसको लेकर संसद में एक बिल लम्बित है। यदि यह बिल कानून बन जाता तो निर्भया का बलात्कारी जेल से बाहर नहीं आ पाता।

पूरा देश देख रहा है कि संसद के दोनों सदनों में पिछले सात माह से हंगामा हो रहा है। हंगामे की वजह से पहले वर्षाकालीन सत्र व अब शीत कालीन सत्र बर्बाद हो रहा है। सवाल यह नहीं है कि कांग्रेस के मात्र 44 सांसद संसद को चलने नहीं दे रहे हैं। सवाल यह है कि नाबालिग को सजा दिलवाने वाला बिल पास क्यों नहीं हुआ? यह उन सांसदों के लिए शर्म की बात नहीं जो हंगामा करते हैं।

संसद में छोटी-छोटी बातों को लेकर बड़े से बड़ा हंगामा होता है, लेकिन बलात्कारी को सजा के मामले में हमारी यह संसद गंभीर नहीं होती। बताया जा रहा है कि नाबालिग की उम्र घटाने के मामले में अनेक सांसदों को रुचि इसलिए नहीं है, क्योंकि उनके परिवार के युवा सदस्य भी कानून के शिकंजे में आ सकते हैं। इसलिए अनेक सांसद यह नहीं चाहते कि अपराध के मामले में नाबालिग की उम्र को आधार माना जाए। यदि अपराध की उम्र 16 वर्ष मानली जाती है तो आज निर्भयाा का बलात्कारी जेल से बाहर नहीं आता। इसे शर्मनाक ही कहा जाएगा कि इस मुद्दे पर देश के किसी भी राजनीतिक दल ने गंभीरता नहीं दिखाई।

तीन वर्ष पहले जैसे हालात
20 दिसम्बर को दिल्ली में एक बार फिर तीन वर्ष पहले जैसे हालात उत्पन्न हो गए हैं। इंडियागेट के बाहर निर्भया के माता-पिता के साथ प्रदर्शन कर रहे हजारों लोग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलने की जिद कररहे हैं।

देशवासियों को याद होगा कि तीन वर्ष पहले जब निर्भया के साथ गैंगरेप हुआ था। तब देश में कांग्रेस का शासन था। इसी इंडियागेट और जतंर-मंतर पर देश का युवा उमड़ पड़ा था। तब भी पीएम, राष्ट्रपति, सोनिया गांधी,राहुल गांधी से मिलने की जिद्द हुई थी। दिल्ली का पूरा माहौल अराजक था। अब हालात बदले हुए हैं।

रिपोर्ट:- शाश्वत तिवारी

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