अप्रैल में हुए अध्ययन में किए गए इस सर्वे में लोगों से कुछ सवाल पूछे गए जैसे कि क्या उन्हें सर्दी या फ्लू जैसे लक्षण महसूस हो रहे है, क्या उनका कोविड-19 टेस्ट पॉजिटिव पाया गया था, या उनका उस बीमारी के लिए इलाज हुआ था या क्या वे इसके इलाज के लिए अस्पताल गए थे। उन्होंने कंपनी की किट का उपयोग कर अपनी जेनेटिक जानकारी भी साझा की।

कोरोना वायरस को दुनिया भर में फैले छह महीने होने को आ रहे हैं। इस दौरान इसने अलग बर्ताव कर शोधकर्ताओं को उलझा रखा है। कुछ लोगों को यह बुरी तरह बीमार कर मौत तक पहुंचा रहा है तो कुछ लोगों को यह तक पता नहीं चलता कि वे संक्रमित हैं। अब एक शोध ने यह पता लगाया है कि सार्स कोव-2 हर तरह के ब्लड ग्रुप वाले लोगों पर एक सा असर नहीं करता है।

बायोटेक कंपनी 23andMe के प्राथमिक शोध से पता चला है कि O टाइप के ब्लड ग्रुप वाले लोगों में सार्स कोव-2 के संक्रमण की आशंका कम होती है।

करीब 75 हजार लोगों में हुए अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों का ब्लड ग्रप O प्रकार का है, उनके बाकी लोगों के मुकाबले कोविड-19 संक्रमित होने की आशंका 9 से 18 प्रतिशत कम है।

एक अलग समूह वाले लोग जिनमें संक्रमित होने की संभावना ज्यादा होती है जैसे हेल्थकेयर और अन्य आवश्यक कार्य करने वाले कर्मचारी, या संक्रमित पाए जा चुके लोगों के संपर्क में रहने वाले लोगों का अलग से अध्ययन किया गया।

ऐसे समूह में पाया गया कि उनमें भी O ब्लड ग्रुप वाले लोगों के संक्रमण की आशंका 13 से 26 प्रतिशत कम है।

शोधकर्ताओं को अन्य ब्लड ग्रुप वाले लोगों में कोई खास अंतर नजर नहीं आया जितना कि O ब्लड ग्रुप वाले लोगों में। यह बात प्रमुखता से पाई गई कि O ब्लड ग्रुप वालों की अस्पताल में भर्ती होने की संभावना कम है।

न्यूजवीक की खबर के मुताबिक इस अध्ययन का अभी रीव्यू नहीं हुआ है और यह अभी किसी वैज्ञानिक जर्नल में प्रकाशित नहीं हुआ है।

अप्रैल में हुए अध्ययन में किए गए इस सर्वे में लोगों से कुछ सवाल पूछे गए जैसे कि क्या उन्हें सर्दी या फ्लू जैसे लक्षण महसूस हो रहे है, क्या उनका कोविड-19 टेस्ट पॉजिटिव पाया गया था, या उनका उस बीमारी के लिए इलाज हुआ था या क्या वे इसके इलाज के लिए अस्पताल गए थे। उन्होंने कंपनी की किट का उपयोग कर अपनी जेनेटिक जानकारी भी साझा की।

अपने अध्ययन में शोधकर्ताओं ने सर्वे में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को दो भागों में बांटा एक वे जो कोविड-19 से संक्रमित थे और दूसरे जो नहीं थे।

उन्होंने पाया कि ABO जीन, जो अलग ब्लड ग्रुप का होना सुनिश्चित करता है, का इस बीमारी से संक्रमित होने के कम जोखिम से संबंधित है।

अध्ययन में पाया गया कि O ब्लड के प्रतिभागियों में से केवल 1.3 प्रतिशत लोग कोविड-19 से संक्रमित थे। वहीं A ब्लड ग्रुप वालों में यह प्रतिशत 1.4 और B और AB ब्लडग्रुप वाले लोगों में यह प्रतिशत 1.5 प्रतिशत था।

जब शोधकर्ताओं ने उन प्रतिभागियों का अलग से अध्ययन किया जिनमें संक्रमण की संभावना ज्यादा होती है, तो उन्होंने पाया कि यहां भी O ब्लड ग्रुप वाले बेहतर हैं और उनमें अन्य के मुकाबले संक्रमण की संभावना कम है। यानी ऐसे समूह में केवल 3.2 प्रतिशत, A में 3.9 प्रतिशत, B में 4 प्रतिशत और AB में 4.1 प्रतिशत संक्रमण पाए गए।

इस तरह का यह इकलौता शोध नहीं है। इससे पहले भी चीन के वैज्ञानिकों ने एक अलग शोध किया था और उसमें पाया था कि O ब्लड ग्रुप वाले लोगों में संक्रमण की आशंका कम है।

वहीं कुछ शोधकर्ताओं का कहना है कि इस अध्ययन में सभी कारकों को शामिल नहीं किया गया है। लेकिन कुछ शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि नतीजे इतने निर्णायक नहीं माने जा सकते।