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चित्रकार हैदर रजा की पुण्यतिथि पर होगा निर्गुण गायन

मंडला – मंडला की माटी के सपूत मशहूर चित्रकार हैदर रजा की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर रज़ा फाउंडेशन द्वारा रज़ा स्मृति समारोह का आयोजन किया गया है। नर्मदा तट पर स्थित रपटा घाट में चित्रकला कार्यशाला का आयोजन किया गया है। इसमें मंडला और खैरागढ़ विश्वविद्यालय सहित मध्यप्रदेश के सभी पांच कला विश्वविद्यालयों के अंतिम वर्ष के छात्र केनवास पर अपनी कल्पना को उकेर कर हैदर रजा को सच्ची श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

आयोजन का हिस्सा बन गौरवान्वित है कलाकार –
इस आयोजन में शामिल प्रतिभागी अपने को गौरांवित मह्सूस कर रहे हैं। प्रतिभागी मेघा सिंह ने बताया कि यहाँ नर्मदा तट पर चित्रकारी करना अपने आप में शानदार अनुभव है। हम कल्पना कर रहे है कि कैसे अपने बचपन में इसी नदी किनारे घूमते होंगे। इतने बड़े कलाकार का बचपन यहाँ बीता और आज हम उनकी प्रथम पुण्य तिथि के आयोजन का हिस्सा इसी जगह पर बन रहे है। मनीष पुष्कर ने कहा कि कि इस कार्यशाला जरिये मंडलावासियों की स्मृति में हैदर रजा की छाप छोड़ सकें क्योंकि मंडला और मंडलावासी ताउम्र हैदर रजा की दिलोदिमाग में छाये रहते थे।

कल होगा निर्गुण गायन –
23 जुलाई की सुबह 9 बजे स्वर्गीय हैदर रज़ा की प्रथम पुण्य तिथि पर रपटा घाट में सुश्री कलापिनी कोमकली निर्गुण गायन की प्रस्तुति देंगी। उल्लेखनीय है कि भारत के सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक कुमार गंधर्व की बेटी कलापिनी कोमकली एक शास्त्रीय गायिका है। अपने पिता की शिष्या रह चुकी कलापिनी वालियर संगीत घराने से ताल्लुल रखती है। कलापिनी फिल्म जगत में एक पहेली और देवी अहिल्या नामक फिल्मों में अपनी आवाज भी दे चुकी है। कलापिनी की माता वसुंधरा कोमकली भी संगीत की दुनिया का बेहद जाना-माना नाम है।

पंडित कुमार गन्धर्व की बेटी है कलापिनी कोमकली –
रज़ा फाउंडेशन के श्याम पहापलकर ने बताया कि उत्स्फूर्त एवं ऊर्जावान गायिका कलापिनी कोमकली को सुनते हुए उनकी गायकी की विविधता, आवाज के उतार चढ़ाव, गति और लय पर उनके प्रभुत्व से, उपज के सैह विस्तार से श्रोता अभिभूत रह जाते हैं। कुछ बिरले भाग्यशाली लोगों में से एक कलापिनी को पंडित कुमार गन्धर्व और विदुषी वसुंधरा कोमकली जैसे माता- पिता ‘गुरु’ के रूप में मिले जिनसे उन्होंने संगीत का ज्ञान, तकनीक और व्याकरण विरासत में पाया। पूर्णतः मौलिक – मधुर एवं दमदार आवाज की धनी गायिका कलापिनी से राग संगीत की बंदिशें, सगुण -निर्गुण भजन, मालवा के लोकगीत सुनना बेहद खास है। उनका नाम आज भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रतिभावान युवा गायकों के बीच काफी लोकप्रिय है।
@सैयद जावेद अली

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