संसदीय व्यवस्था अभी अपने यहां अपरिपक्व स्तर पर है : दीक्षित

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लखनऊ: उप्र विधान सभा के अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने विभिन्न देशो की संसदीय संस्थाओं (पार्लियामेण्ट) के 47 प्रतिभागियों से भेंट की। इसमें अफ्रीका, श्रीलंका, अफगानिस्तान, कांगो, घाना, फिजी, नामीबिया, नाइजीरिया, नेपाल, फिलीपीन्स, मॉरीशियस, भूटान, वियतनाम, जिम्बाम्बे, केन्या एवं अन्य देशो के प्रतिनिधि सम्मिलित थे। विभिन्न देशो के प्रतिनिधिगण लोक सभा सचिवालय द्वारा संसदीय एवं प्रशिक्षण ब्यूरो के इंटर्नशिप कार्यक्रम के अन्तर्गत उ0प्र0 विधानसभा की संसदीय परम्परा के अध्ययन भ्रमण पर आये है।

संसदीय दल के सदस्यां को सम्बोधित करते हुए श्री दीक्षित ने कहा कि दुनिया के सभी देशो में संसदीय संस्थाओं के प्रति आकर्षण बढ़ा है। इन संस्थाओं को सुसंगत रूप से विकसित करने की आवश्यकता है।

श्री दीक्षित ने कहा कि भारत में वैदिक काल से सभा और समितियां, तर्क-प्रतितर्क, वाद-विवाद के साथ शासन प्रणाली की व्यवस्था मौजूद रही है। आज की संसदीय व्यवस्थाएं उसी का विस्तार है। दुनिया के अन्य देशो में भी ब्रिटिश संसदीय पद्धति के पहले उनकी सभ्यता में किसी न किसी रूप में संसदीय व्यवस्था का स्वरूप मौजूद रहा होगा। शून्य की स्थिति नहीं रही होगी। यदि शून्य रहा होता तो तमाम देश ब्रिटिश संसदीय व्यवस्था को ग्रहण न कर पाते। उन्होंने सभी प्रतिनिधियों का आह्वान किया जब वे अपने देश लौटकर जाएं, तो इस बात की खोज अवश्य करें कि उनके देश में संसदीय जनतंत्र की व्यवस्थाएं प्राचीन काल में किस रूप में और किस काल से मौजूद रही।

श्री दीक्षित ने प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि संसदीय व्यवस्था अभी अपने यहां अपरिपक्व स्तर पर है। परिपक्वता की ओर बढ़ रही है। उन्होंने इस विचार को बहुत अच्छा बताया कि दुनिया के अनेक देशो की पार्लियामेण्ट के प्रतिनिधि दूसरे देशो में जाकर संसदीय व्यवस्था के बारे में गहन विचार-विमर्श और संबंधित देशों की संसदीय व्यवस्थाओं के अच्छे प्रतिमानों से सीखने का प्रयास कर रहे हैं। इससे संसदीय व्यवस्थाएं और भी परिपक्वता की ओर बढे़गी।

अफ्रीका, श्रीलंका, मॉरीशियस, भूटान, वियतनाम, जिम्बाम्बे, केन्या एवं अन्य देशो से आये प्रतिनिधियों ने मा0 अध्यक्ष का स्वागत किया और उनके आतिथ्य की प्रशंसा की। प्रतिनिधियों द्वारा उत्तर प्रदेश संस्कृति और सभ्यता के बारे अपनी अभिरूचि प्रदर्शित करते हुए उसकी भी भूरि-भूरि प्रशंसा की।

इस अवसर पर लोक सभा सचिवालय के संसदीय एवं प्रशिक्षण ब्यूरो के निदेशक अल्पना त्रिपाठी व उ0प्र0 विधान सभा के प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे ने भी विदेशी प्रतिनिधियों को संबोधित किया।
@शाश्वत तिवारी