जम्मू- कश्मीर : पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के वरिष्ठ नेता और सांसद मुजफ्फर हुसैन बेग ने शनिवार को भीड़ हिंसा को लेकर एक विवादित बयान दिया है।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, उन्होंने गौरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा की घटनाओं के संबंध में कहा, ‘गाय और भैंस के नाम पर मुसलमानों का कत्ल बंद करें वर्ना नतीजें अच्छे नहीं होंगे। 1947 में एक बंटवारा हो चुका है।’

बता दें कि उन्होंने यह बयान पीडीपी रैली के दौरान गौरक्षा के नाम पर हो रहे हमलों का जिक्र करते हुए दिया है।

उल्लेखनीय है कि इन दिनों देश में भीड़ हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं और हाल ही में राजस्थान के अलवर में कथित गोरक्षकों ने रकबर खान नाम के शख्स की गो-तस्कर के शक में पीट-पीट कर हत्या कर दी थी।

बता दें कि रकबर खान दूध, दही बेचकर अपने परिवार की माली हालत सुधारने के लिए गाय खरीदकर अपने गांव लेकर जा रहे थे। इस घटना के बाद भाजपा लगातार विपक्षियों के निशाने पर है।

वहीं दूसरी ओर जम्मू कश्मीर में पीडीपी से भाजापा के समर्थन वापस लेने के बाद से लगातार धमकियों का सिलसिला जारी है। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी भीड़ हिंसा के जरिए केंद्र सरकार पर हमला बोला था।

महबूबा ने कहा था कि जिस तरह किसी के खाने को लेकर भीड़ हिंसा को जायज ठहराया जा रहा है। फिर रेप जैसे अपराधों का भी बचाव किया जा सकता है। क्या इसी तरह के भारत की हम कल्पना करते हैं? इससे पहले राज्य में भाजपा के जोड़-तोड़ कर सरकार बनाने के कयासों के बीच महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि अगर पीडीपी को तोड़ने की कोशिश की गई तो घाटी में सलाहुद्दीन जैसे कई लोग पैदा हो जाएंगे।

गौरतलब है कि 17 जुलाई को चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली एक अन्य पीठ ने कहा था कि ‘भीड़तंत्र के ऐसे भयानक कृत्य से कानून को कुचलने की इजाजत नहीं दी जा सकती।’ साथ ही पीठ ने संसद को मॉब लिंचिंग और गौरक्षकों के नाम पर हिंसा करने वालों से सख्ती से निपटने के लिए कड़े कानून बनाने को कहा था।