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वर्ल्ड सूफी फोरम: अल्लाह रहमान और रहीम है- मोदी

PM Modi addresses Indian expatriates at Dubai cricket stadiumनई दिल्ली- ‘वर्ल्ड सूफी फोरम’ सम्मेलन को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्बोधित करते हुए कहा कि अल्लाह के 99 नामों में से कोई भी हिंसा से नहीं जुड़ा है और “सूफीवाद शांति, सह-अस्तित्व, करुणा, समानता और वैश्विक भाई चारे का आह्वान है !” अल्लाह रहमान और रहीम हैं। मोदी ने उन लोगों पर भी निशाना साधा जो धर्म की आड़ में पूरी दुनिया मं आतंक फैलाते हैं ! उन्होंने कहा, “जो लोग धर्म के नाम पर आतंक फैलाते हैं वे धर्म विरोधी हैं ! आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई किसी धर्म के खिलाफ नहीं है और न ही यह हो सकती है !”

आल इंडिया उलेमा एंड मशाइख बोर्ड (एआइयूएमबी) की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में मोदी ने कहा, ‘सूफी का संदेश वैश्विक है। यह सभी को एक मानता है और किसी में भेदभाव नहीं करता।’ उन्होंने कहा कि जब हम अल्लाह के 99 नामों के बारे में सोचते हैं, कोई भी हिंसा से जुड़ा नहीं है। पहले दो नाम करुणा और दया के प्रतीक हैं। अल्लाह रहमान और रहीम हैं।

मोदी ने कहा कि सूफी विचार इस्लाम के दुनिया के सबसे अहम योगदान में से एक है। अफ्रीका से लेकर दक्षिण और मध्य एशिया तक, ईरान से लेकर भारत तक इसने सभ्यताओं के विकास में अहम योगदान किया है। यह कहता है कि अगर हम ईश्वर को प्यार करते हैं तो हमें उनके बनाए सभी लोगों से भी प्यार करना चाहिए। हजरत निजामुद्दीन औलिया और बुल्ले शाह ने यही संदेश दिया है कि ईश्वर सभी के दिल में रहता है। मोदी ने कहा कि सूफी विचार भारत में इस्लाम का चेहरा बन गया। भारतीय संगीत और कविता के विकास में इसका महत्व अद्भुत है। जिस तरह आतंकवाद की पहुंच लगातार बढ़ रही है, उस समय अमीर खुसरो ने जिस दुनिया की बात की थी, वह आज बहुत अहम हो गई है।

मोदी ने कहा कि आतंकवाद की बढ़ती समस्या के बीच सूफी विचार और महत्वपूर्ण होता जा रहा है। उन्होंने इसे इस्लाम की सबसे अहम देन में से एक बताया। साथ ही कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई किसी धर्म के खिलाफ नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ का जो नारा उन्होंने दिया है, उसके पीछे सूफी विचार ही है। दिल्ली का विज्ञान भवन गुरुवार को ‘व‌र्ल्ड सूफी फोरम’ के मौके पर विभिन्न संस्कृतियों का समागम बन गया। शांति और भाईचारे के नारे को आगे बढ़ाने के लिए दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से सूफी विचार को मानने वाले यहां आ जुटे थे।

तीन दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस्लाम, कुरान और सूफी विद्वानों के हवाले से जो बातें कहीं, उसे सुनकर वहां मौजूद दुनियाभर के सूफी नेता, धर्मगुरु और विद्वानों ने खड़े होकर उनका जोरदार अभिनंदन किया।

20 देशों से यहां पहुंचे अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ‘शांति की धरती पर स्वागत’ करते हुए मोदी ने कहा, ‘सूफी विचार आधारभूत रूप से आतंकवाद का विरोधी है। इस्लाम का शाब्दिक अर्थ ही है शांति। आज के समय में सूफीवाद का संदेश खास तौर पर अहम हो गया है क्योंकि आतंकवाद वर्तमान समय का सबसे बड़ा दु:स्वप्न बन गया है। आतंकवाद हमें बांटता है और हमें नष्ट करता है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई किसी धर्म के खिलाफ नहीं है। आतंकवाद तरह-तरह से लोगों को उकसाने की कोशिश करता है और कारण बताता है, जिनमें से किसी को सही नहीं बताया जा सकता। मानवीयता के मूल्यों और अमानवीयता की ताकतों के बीच संघर्ष में सूफी विचार बेहद अहम भूमिका निभा सकता है।’

दुनिया में आतंकवाद के बढ़ते खतरे के बारे में मोदी ने कहा कि पिछले साल (2015) में ही 90 से ज्यादा देशों में आतंकवादी हमले हुए। सौ देशों में मां-बाप सीरिया में मारे गए बच्चों के दर्द के साथ सोते हैं। जो धर्म के नाम पर हिंसा कर रहे हैं, वे धर्म विरोधी हैं। विविधता प्रकृति की मूल वास्तविकता है।

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