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बालाघाट – पुलिस जंगलों में बसे जिले के नक्सल प्रभावित करीब 50 स्कूलों को गोद लेगी। कवायद का कारण इन इलाकों में बेपटरी हो रही शिक्षा और शिक्षकों का लापरवाह रवैया है। इसके लिए पुलिस ने ‘बच्चे हमारा भविष्य’ प्रोग्राम चलाने का निर्णय लिया है। आदिवासियों का भविष्य संवारने पुलिस शिक्षा विभाग व जिला प्रशासन के सहयोग से ये योजना चलाएगी। इतना ही नहीं पुलिस अपने इसे कार्यक्रम की नियमित मॉनिटरिंग भी करेगी।

इन स्कूलों को लिया जाएगा गोद
सुलसुली ,सीतापाला , देबरवेली ,मछुरदा, सालेटेकरी, उकवा, बिठली, डाबरी, सोनगुड्डा, पितकोना, गोदरी, कीन्ही, डोर, लातरी, पाथरी, चरेगांव, गढ़ी ,बेहला, रूपझर, मलाजखंड, अडोरी,कोरका समेत करीब आधा सैकड़ा गांवों के 50 स्कूलों को गोद लिया जाएगा।

बालाघाट की पुलिस नक्सल प्रभावित गांवों में क, ख, ग, घ पढ़ाते हुए नजर आएगी। इन गांवों में बने स्कूलों से शिक्षक अमूमन नदारद ही रहते हैं।नक्सल प्रभावित क्षेत्र में संचालित पुलिस चौकी व थानों में पदस्थ पुलिस अधिकारियों के अलावा वरिष्ठ स्तर के अधिकारी भी एक-एक स्कूल गोद लेंगे। इसमें एसपी, एएसपी, सीएसपी, एसडीओपी शामिल हैं। ये अधिकारी निश्चित समय पर स्कूलों में पहुंचे बच्‍चों को पढ़ाई में दक्ष करेंगे।

पुलिस अधीक्षक गौरव तिवारी की मानें तो जिले के नक्सल प्रभावित इलाकों में खासकर जंगलों में स्थित स्कूलों में शिक्षक अक्सर नदारद रहते हैं। इसके चलते यहां शिक्षा का स्तर कमजोर है। इसे सुधारने व शिक्षकों की लापवारही पर अंकुश लगाने सामुदायिक पुलिसिंग के तहत पुलिस नियमित मॉनीटरिंग की पहल करेगी। इस संबंध में शिक्षा विभाग व जिला प्रशासन के साझा सहयोग से यह अभियान चलाया जाएगा। पुलिस अधिकारी स्कूलों में जाकर बच्चों से नियमित फॉर्मेट में प्रश्नोत्तरी करेंगे।

 

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