कांग्रेस के लिए आगामी आम चुनाव में प्रभावशाली मानी जा रहीं प्रियंका गांधी वाड्रा बुधवार को पार्टी महासचिव के तौर पर अपना पदभार औपचारिक तौर पर संभाल लेंगी।

लेकिन इसके पहले ही दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के बाहर लगे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा के पोस्टर पर बवाल हो गया जिसके बाद कुछ ही घंटों में ये पोस्टर उतारने पड़े।

दरअसल इस पोस्टर में राहुल और प्रियंका के साथ रॉबर्ट वाड्रा भी नजर आ रहे हैं जो भूमि घोटाला मामले में अंतरिम जमानत पर हैं।

यही वजह है कि विपक्षियों ने इसकी आलोचना शुरू की तो कांग्रेस बैकफुट पर आ गई और अब रात में लगाए गए पोस्टर हटाए जा रहे हैं।

बता दें कि कांग्रेस मुख्यालय के बाहर करीब 150 पोस्टर लगे थे। आज सुबह एनडीएमसी उन पोस्टरों को हटा रही है जिनमें रॉबर्ट वाड्रा भी मौजूद हैं। इन पोस्टरों पर लिखा था ‘कट्टर सोच नहीं, युवा जोश’।

एनडीएमसी का कहना है कि जो पोस्टर गलत जगह लगे थे उन्हें हटाया गया है।

राहुल के पुराने कमरे में बैठेंगी बहन प्रियंका

कांग्रेस की नई महासचिव और पूर्वी यूपी की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा को पार्टी मुख्यालय में कमरा आवंटित हो गया है। प्रियंका भाई और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बगल में उनके पुराने कमरे में बैठेंगी।

बतौर उपाध्यक्ष राहुल लंबे समय तक इसी कमरे में बैठते थे। जबकि अध्यक्ष बनने के बाद राहुल अपनी मदद के लिए के.राजू को इस कमरे में बैठाया था।

प्रियंका के साथ महासचिव और पश्चिम यूपी की जिम्मेदारी पाने वाले सांसद ज्योतिरादित्य को उनके धुर विरोधी रहे दिग्विजय सिंह के कमरे में जगह मिली है।

दिग्विजय के कमरा छोडने के बाद इसे आंध्रप्रदेश के प्रभारी ओमान चांडी को बैठाया गया।

इसी बीच अहमद पटेल कोषाध्यक्ष बने तो मोतीलाल वोरा को चांडी के साथ कमरा शेयर करना पड़ा। अब चांडी के साथ ज्योतिरादित्य कमरा शेयर करेंगे।

मोतीलाल वोरा का कमरा एक बार फिर बदल गया है। वे ठीक सामने महासचिव गुलाम नबी आजाद का कमरा शेयर करेंगे।

एआईसीसी में जिन केसी.वेणुगोपाल की वजह से विवाद शुरू हुआ था उन्हें वही कमरा मिल गया जहां उनसे पूर्व के दो महासचिव संगठन बैठते आए हैं।

जनार्दन द्विवेदी और अशोक गहलोत के बाद महासचिव संगठन का जिम्मा पाने वाले वेणुगोपाल नार्थईस्ट के कई राज्यों के प्रभारी लुईजिन्हो फैलेरियो का कमरा शेयर कर रहे थे।

पद मिलने के बाद वेणुगोपाल एक दिन महासचिव संगठन के कमरे में कुछ देर आकर बैठे तो वरिष्ठ नेताओं ने उनके निकलते ही कमरे में ताला लगवा दिया।

करीब दो सप्ताह बाद नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद कमरों के आवंटन के साथ बाहर नेम प्लेट भी लग गई हैं।