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गर्भवती महिलाएं मांस और सेक्स को कहें नो

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स्वस्थ बच्चा पैदा करने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार के मंत्रालय ने महिलाओं को कुछ सुझाव दिए हैं। आयुष मंत्रालय के मुताबिक गर्भावस्था में महिलाओं को मांस, सेक्स और बुरी संगत से बचना चाहिए। मंत्रालय के मुताबिक एेसे समय में महिलाओं को अपने कमरे में स्वस्थ बच्चे की खूबसूरत तस्वीरें लगानी चाहिए।

एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार द्वारा सहायता प्राप्त संस्थान सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन योगा एंड न्यूपोपैथी की एक बुकलेट मदर एंड चाइल्ड केयर में गर्भवती महिलाओं को यह सुझाव दिए गए हैं। इस संस्थान की वेबसाइट पर योग और न्यूरोपैथी को स्वास्थ्य के लिए प्राचीन भारतीय परंपराएं कहा गया है।

बता दें कि भारत में हर साल 26 मिलियन बच्चे पैदा होते हैं। इस बुकलेट को आयुष मंत्रालय के राज्यमंत्री श्रीपद नाइक ने जारी किया था। हालांकि इस मामले पर बातचीत के लिए नाइक से संपर्क नहीं हो पाया है।

एचटी के मुताबिक सरकार का यह सुझाव मुफ्त है, क्योंकि पिछले महीने जामनगर के गर्भविज्ञान अनुसंधान केंद्र ने जोड़ों से पैसे लेकर यह सुझाव दिया था कि वह शुभ दिन यौन संबंध बनाएं और इसके बाद संयम बरतें। इसके लेकर काफी हंगामा हुआ था।

अपोलो हेल्थकेयर ग्रुप के जीवन माला हॉस्पिटल एंड नोवा स्पेशलिटी हॉस्पिटल में सीनियर गायनोकॉलोजिस्ट डॉ.मालविका सभरवाल ने कहा कि सरकार का यह सुझाव बेतुका है। उन्होंने कहा कि प्रोटीन की कमी, कुपोषण और एनिमिया गर्भवती महिलाओं के स्वास्थय के लिए चिंता का सबब है और मीट में प्रोटीन और आयरन दोनों ही होते हैं। उन्होंने कहा, रही बात सेक्स की तो यदि गर्भावस्था सामान्य है, तो संयम की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि गर्भ में बच्चे को अमीनोटिक द्रव और गर्भाशय की मांसपेशियों द्वारा संरक्षित किया जाता है।

वहीं फोर्टिस गुड़गांव में प्रसूति एवं स्त्री रोग की निदेशक डॉ.सुनीता मित्तल ने कहा कि पहली तिमाही के दौरान जब प्लेसेंटा कम होता तो सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। साथ ही मुश्किल गर्भावस्था में, जहां गर्भपात का खतरा हो, वहां भी। कुछ रिसर्च में पता चला है कि महिला का स्ट्रेस लेना, थकान और डिप्रेशन में आने से बच्चे की विकास पर असर पड़ सकता है।

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