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बेजुबान जानवरों को नयी जिदंगी दे रही है रिचैल

Rachael Giving new life to helpless animals 1अजमेर – बेजुबान जानवरों की सेवा करने का जुनून ने एक युवती को सात समन्दर पार से अजमेर में खीच लाया है। इंग्लेड के एक सरकारी अस्पताल में नर्स की नौकरी करके प्रतिमाह एक लाख रूपये की वेतन पाने वाली रिचैल भारत भ्रमण करने पहुंची तो बेजुबान जानवरों की जिंदगी से खिलवाड होता देख एक लाख रूपये की नौकरी को छोड कर सात समन्दर से अजमेर आर्इ रिचैल ने वर्ष 2006 से लेकर अब तक तीन लाख से ज्यादा उन पशुओं को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया, जिन्हें उनके मालिकों ने मरने के लिये छोड दिया था। स्वयं के पैसे से जानवरों का उपचार कर रही टोल्फा ट्री आफ लाइफ एनीमल्स संस्था की संचालक रिचैल को निगम व पशुपाल विभाग की ओर से कोर्इ सहायता नही मिलने पर सिर्फ दुख है, जबकि उसे बीमार जानवरों का उपचार करने लिये संघर्ष से झूझना पड रहा है।


ट्रस्टी अमर सिंह राठौड ने बताया कि रिचैल राइट के भारत भ्रमण के बाद मानों उनकी जिंदगी का मकसद ही बदल गया। इस मकसद को पूरा करने के लिये एक करोड रूपये सालाना नौकरी का पैकेज ठुकरा कर पिछले 11 सालों से अजमेर जिले के खरखेडी गांव में लावारिस, बीमार व असहाय जानवरों की सेवा में जुटी है। बाकायदा इसके लिये आर्थिक से आठ हजार स्क्वायर फीट क्षेत्रा में पशु चिकित्सालय बनवाया गया है।


अजमेर के पास खरेखडी गाँव सिथत टोल्फा टोल्फा ट्री आफ लाइफ एनीमल्स नामक संस्था विगत 10वर्षो से बेजुबान जानवरो के कल्याण हेतु कार्य कर रही है। दरअसल इंगलैंड की रहने वाली रिचैल रार्इट सन 2005 में पुष्कर मेले में घूमने आर्इ था, यहाँ के पशु मेला मैदान के पास उसने देखा कि 4 आवारा कुत्तो को बाँध कर मेला क्षेत्रा से दूर मरने के लिए छोड दिया। सâदय रिचैल का पसीज गया और उसने तभी तय कर लिया कि वो अपनी जिन्दगी अब इन बेजुबान जानवरो को समर्पित करेगी।


अजमेर शहर के बाहर फाय सागर के पास सिथत बनी संस्था के इस भवन को बाहर से देखने पर यह पता तक नहीं चल पाता कि विगत 10वर्षो में यहाँ हजारो की संख्या में आवारा पशुओ का उपचार नि:शुल्क किया गया होगा। इंग्लैण्ड की रिचैल रार्इट ने ट्री आफ लार्इफ फार एनिमल्स नामक संस्था बनार्इ और 2006 में इसका रजिस्ट्रेशन किया। आंकडों की सूचि काफी लम्बी है। अब तक इस संस्था द्वारा 21 हजार से ज्यादा आवारा पशुओ की जान बचार्इ जा चुकी हैं। 3 लाख 30हजार से ज्यादा आवारा पशुओ का नि: शुल्क उपचार किया जा चुका है। कुछ समय तक तो नगर निगम का सहयोग मिला था, लेकिन अब मिलना बंद हो गया, उस समय जब नगर निगम के सहयोग से टोल्फा ने अब तक 18 हजार कुत्तो की नसबंदी की, जबकि 22 हजार से ज्यादा कुत्तो को रेबीज का टीका लगाया गया। संस्था अस्पताल में जानवरो की सर्जरी के लिए आपरेशन थियेटर सहित पशु चिकित्सको की पूरी टीम मौजूद है। अजमेर और पुष्कर में यदि कोर्इ पशु दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है तो संस्था की टीम मौके पर पहुँच कर अपने वाहन से उसे लेकर आती है और उपचार उसे वापिस छोड दिया जाता है, सबसे बडी बात की लगभग एक लाख प्रतिमाह का खर्चा रिचैल अपने निजी सहयोग और दानदाताओ के माध्यम से कर रही है। विगत 3 वर्षो से अजमेर नगर निगम द्वारा कोर्इ सहयोग नहीं दिया गया। संस्था के ट्रस्टी अमर सिंह राठौड ने बताया कि शहर में कही भी बीमार या दुर्घटना का शिकार कोर्इ पशु हो तो संस्था अपने संसाधनो से उसे संस्था  अस्पताल लाती है और उपचार करती है।


रेस्क्यू प्रोग्राम लावारिस, बीमार व असहाय जानवर का नि:शुल्क इलाज। ऐसा कोर्इ पशु आप कही भी देखे तो तुरंत 9829965585 पर नबंर पर काल करे। एंबुलेंस मौके पर पहुंचेगी। बीमार पशु को अस्पताल पहुंचाएगी। पशु जब स्वस्थ्य हो जायेगा तो उसे वापस उसी स्थान पर छोडा जायेगा। जहां से उठाया गया था।


वैक्सीनेशन व नसबंदी प्रोग्राम टोल्फा इस प्रोग्राम के तहत अब तक  22612 कुत्तों का एंटी रैबीज वैक्सीनेशन कर चुका है।एज्युकेशन प्रोग्राम गांव-गांव व शहरों के स्कूलों में जाकर पशु कल्याण  (एनीमल्स वेलफेयर) की जानकारी दी जाती है।रूरल डवलपमेंट प्रोग्राम खरखेडी के आसपास के सभी गांव, अजयसर, कालीपुरा, खेडा, ढाणी समेत अन्य गांवों के सभी जानवरों का नि:शुल्क उपचार करना और ग्रामीणों को पशुधन की अहमित की जानकारी देना। इस प्रोग्राम के तहत जानवरों के बडे से बडै आपरेशन फ्री किये जाते है।

रिपोर्ट :- सुमित कलसी

 

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