ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले अर्द्धसैनिक बलों को देंगे शहीद का दर्जा: राहुल गांधी

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नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी शनिवार को जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में छात्रों को संबोधित करने पहुंचे। शिक्षा: दशा और दिशा नाम से आयोजित इस कार्यक्रम में राहुल गांधी ने शिक्षा की वर्तमान स्थिति को लेकर दिल्ली के कई कॉलेजों के स्टूडेंट से बातचीत की। इस दौरान राहुल नए लुक में नजर आएं, छात्रों के बीच वो जींस-टीशर्ट और हाफ जैकेट में पहुंचे। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्र गान और पुलवामा के शहीदों के श्रद्धांजली देकर की गई

दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के छात्र के सवाल के जवाब में राहुल ने कहा कि आज देश में सब कुछ 15 से 20 लोगों के लिए हो रहा है, अपना फोन देखिए, बंदरगाह देखिए कुछ लोगों के लिए काम हो रहा है। हम चाहते हैं कि राज्य अपने बजट का ज्यादा से ज्यादा शिक्षा पर करे। आप देख सकते हैं कि हमारी सरकार के बाद शिक्षा के बजट में कमी आई है। बीजेपी को लगता है कि आप निजिकरण से शिक्षा में प्रगति ला सकते हैं। लेकिन हम इसमें विश्वास नहीं करते।

राहुल गांधी ने कह कि, सरकार ने उद्योगपतियों को 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक दिए। उन्होंने पूछा कि, क्‍या पिछले 5 साल में कोई नई यूनिवर्सिटी खोली गई, किसानों का कर्ज माफी नहीं हुआ है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोग एक के बाद एक विश्वविद्यालयों में बैठाए जा रहे हैं। उन्हें सिर्फ अपनी विचारधारा से मतलब है, छात्रों से कोई लेना देना नहीं है। वो चाहते हैं कि हिंदुस्तान का शिक्षा तंत्र उनका गुलाम बन जाए। लेकिन ऐसा नहीं हो सकता, हमारा जवाब होगा कि इन संस्थाओं को स्वतंत्रता मिले, छात्रों को तय करने का मौका दिया जाए।

वहीं एक पीएचडी की छात्रा ने राहुल गांधी से पूछा कि, देश के लिए जान देने वाले अर्धसैनिक बलों को शहीद का दर्जा क्यों नहीं दिया जाता है। इस पर राहुल ने कहा कि, अर्द्धसैनिक बलों को शहीद का दर्जा नहीं मिलता है, हमारी सरकार आएगी तो उन्हें शहीद का दर्जा मिलेगा।

देश और दुनिया में दक्षिणपंथ के उभार के सवाल पर राहुल गांधी ने कहा कि, जब आप भारत, अमेरिका और यूरोप के देशों को देखेंगे तो सबसे बड़ी समस्या नौकरियों की हैं। इस समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा, यही कारण है कि गुस्सा बढ़ रहा है और दक्षिणपंथी संगठन उस गुस्से का इस्तेमाल कर रहे हैं। हमारी सरकार मानना ही नहीं चाहती कि नौकरियों का संकट है। हमारा मुख्य मुकाबला चीन के साथ है. लेकिन सरकार यह स्वीकार नहीं कर रही कि देश में रोजगार संकट है। इसका हल हो सकता है, लेकिन इससे पहले मानना होगा कि कहीं न कहीं समस्या है। इसके अलावा राहुल गांधी ने अपने छात्र जीवन के कई किस्से छात्रों के साथ शेयर किए। अपने छात्र जीवन के दौरान सेंट स्टीफन कालेज के एक किस्सा करते राहुल ने कहा कि, स्टीफन्स में पेड़ के नीचे उनकी रैगिंग हुई थी।

राहुल ने बताया कि, मैं अमेरिका पढ़ने के लिए गया तब मुझे कल्चरल शॉक लगा। जब मैने देखा कि वहां पर छात्र कितना आक्रामक होकर सवाल पूछते हैं। राहुल गांधी ने अपनी दादी इंदिरा गांधी की हत्या को याद करते हुए कहा कि, जब मेरी दादी की मौत हुई, मेरे पापा बंगाल में थे, मेरी दादी मेरे लिए मेरी मां से भी ज्यादा थी। मेरी दादी की हत्या उनके सिक्योरिटी वालों ने की थी, सतवंत सिंह ने मुझे बैडमिंटन सिखाया था। मुझे काफी गुस्सा था जब मेरी दादी की हत्या हुई, लेकिन जब मेरे पिता आए और उन्होंने मुझे गले लगाया तो मेरा गुस्सा चला गया। राहुल ने बताया कि, मैं शामली शहीद जवान के परिवार से मिलने गया तो मुझे लगा मेरे पिता की हत्या भी बम घमाके से हुई, इसलिए मुझे पता था कि वो कैसा महसूस कर रहे हैं। इसके अलावा मेरी दादी को 32 गोलियां मारी गई। लेकिन आज हमसे पूछेंगे तो मैं यही कहूंगा कि हिंसा को प्यार से ही मिटाया जा सकता है। महात्मा गांधी, अशोक के जीवन से हमें यही संदेश मिलता है। राहुल गांधी ने कहा कि, हिंदुस्तान में प्रधानमंत्री जो कहते हैं उसकी अनुभूति पूरे सिस्टम में जाती है। यदि प्रधानमंत्री नफरत के माहौल की निंदा करें और भाईचारे, प्यार का संदेश दें तो नफरत का माहौल अपने आप ठंडा हो जायेगा।