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अमेठी: स्मृति ईरानी के खिलाफ सड़क पर उतरी महिलाएँ

अमेठी. बीजेपी नेता एवं केंद्रीय स्मृति ईरानी मंत्री कल तक जिन अमेठी की महिला-पुरुष दोनों वर्गों में ‘दीदी का खिताब पाई थी’ अब उन्हीं में से कुछ महिलाएँ उनके खिलाफ यहां सड़क पर उतर आई हैं। मामला है राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़ा है, जिसमें हज़ारों महिलाएँ काम करती हैं। लेकिन राजनैतिक नूराकुश्ती के चलते केंद्रीय मंत्री ने इनकी नौकरियों पर तलवार गिराने की सोंच ली थी।
*इलाहाबाद उच्च न्यायलय ने दिया था भाजपा को झटका*
बता दें कि अमेठी में केंद्रीय मंत्री को अब मिले इस झटके से दो दिन पूर्व राजीव गांधी ट्रस्ट की ज़मीन के मुद्दे पर इलाहाबाद उच्च न्यायलय ने भाजपा को बड़ा झटका दिया था। कोर्ट ने एक क अंतरिम आर्डर पास करके जायस में वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर को अपनी गतिविधियां जारी रखने की अनुमति दे दिया है। हाई कोर्ट ने आदेश जारी किया था कि ट्रेनिंग सेंटर की सभी गतिविधियां फिलहाल चलती रहेंगी। वहीं कांग्रेस एमएलसी दीपक सिंह ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि केंद्रीय कपडा मंत्री स्मृति ईरानी के इशारों पर उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार जायस सेंटर को बंद करवाना चाहती थी।

*15 लाख महिलाओं का बदला है जीवन*
सनद रहे कि उक्त सेंटर 15 साल से चल रहा है, और 15 लाख से अधिक महिलाओं का अब तक जीवन बदल चुका है। ऐसे में कोर्ट का आदेश अमेठी की महिलाओं और जायस सेंटर के लिए बड़ी जीत बताई जा रही है। जिसको लेकर जहां इन महिलाओं ने राजीव गांधी महिला विकास परियोजना के बैनर तले कोर्ट के फैसले का सम्मान कर खुशी मनाई वहीं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के विरोध में नारेबाजी भी किया।

*प्रशासनिक तौर पर ये हुई थी कार्यवाई*
यहां बता दें कि योगी आदित्यनाथ की सरकार आते ही 22 अप्रैल को राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट को नोटिस भेजा था। जिसमें तिलोई तहसील के सब डिविज़नल मजिस्ट्रेट अशोक शुक्ल का कहना है ये ज़मीन सरकारी कब्ज़े में होनी चाहिए।

हालांकि उन्होंने ये माना कि ट्रस्ट ये ज़मीन स्थानीय महिलाओं को ट्रेनिंग देने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कोई ऐसे कागजात मौजूद नहीं हैं जिससे ये पता चल सके कि ट्रस्ट किस अधिकार से राजीव गांधी महिला परियोजना इस ज़मीन का इस्तेमाल कर रही थी। गत 17 मई को एसडीएम श्री शुक्ला ने ट्रस्ट को एक सप्ताह की अल्टिमेटम नोटिस दिया था, जिसमें ज़मीन वापस लेने से लेकर विधिक कार्यवाई की बात कही गई थी।
लेकिन ठीक दूसरे दिन इलाहाबाद हाईकोर्ट का ट्रस्ट को राहत दिलाने वाला अंतरिम आदेश आ गया। ऐसे में फिलहाल राहुल गांधी की जीत हो गई है लेकिन अब देखना ये शेष है की स्मृति बनाम राहुल की नूराकुश्ती में असल विजय किसके हाथ लगती है।
रिपोर्ट@राम मिश्रा

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