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नोटबंदी : उपसभापति कूरियन ने नकवी को लगाई डांट, दी चेतावनी

p-j-kurienनई दिल्ली : नोटबंदी के मुद्दे पर राज्यसभा में जारी हो-हंगामे पर बुधवार को उपसभापति पी.जे. कुरियन का पारा चढ़ गया। कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे कुरियन ने सत्तापक्ष द्वारा सदन की कार्यवाही में बाधा डालने की कोशिशों पर नाराजगी जताते हुए सत्तापक्ष के सांसदों पर कठोर टिप्पणी की। सांसद मुख्तार नकवी पर नाराज होकर उपसभापति ने उनके खिलाफ कार्रवाई की भी चेतावनी दी।

नोटबंदी को लेकर राज्यसभा में चल रही बहस के दौरान कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा अपनी बात रख रहे थे। वह गृहिणियों और आम लोगों को नोटबंदी के कारण होने वाली परेशानी का जिक्र कर रहे थे। इसी दौरान सत्तापक्ष के सांसदों ने उन्हें रोकने और बीच में दखल देने की कोशिश की। ट्रेजरी बेंच पर बैठे सत्तापक्ष के सांसदों ने आनंद शर्मा को बीच में टोकने की कोशिश की। इस पर उपसभापति पी.जे.कुरियन भड़क गए और उन्होंने सख्त प्रतिक्रिया करते हुए कहा, ‘आप मेरा काम नहीं कर सकते। अगर आप ऐसा करते हैं, तो आपमें से एक को यहां आना होगा और मेरी जगह पर बैठना होगा।’ मालूम हो कि ट्रेजरी बेंच सभापति की कुर्सी के दाहिनी ओर पहली पंक्ति में बैठे सत्ताधारी सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों को कहा जाता है।

राजसभा मै नौटबंदी की चचाँ विपक्ष की और से पहेले दीन हुइ विपक्ष की नौंदबंदी पर जवाब देने का समय जब सरकार का आया तेा विपक्ष संसद नही चलने दे रहा है ।कूरियन भेदभाव कर रहा है कोइ बात नही कोग्रेस और विपक्ष को जो उखाड ना है वो उखाड दे जनता नौटबंदी के साथ है ।

उपसभापति कुरियन ने ट्रेजरी बेंच को बीच में दखल न देने की हिदायत दी। अपनी बात जारी रखते हुए आनंद शर्मा ने कहा, ‘लोगों को उनका ही पैसा नहीं दिया जा रहा है। ऐसा करके संविधान का उल्लंघन किया गया है।’ उनके इतना कहते ही एकबार फिर ट्रेजरी बेंच की ओर से शोर-शराबा होने लगा। इसपर उपसभापति अपनी कुर्सी से उठकर खड़े हुए और उन्होंने आनंद शर्मा को एक मिनट के लिए चुप रहने को कहकर ट्रेजरी बेंच से कहा, ‘मैं इस बात की इजाजत नहीं देता। मैंने उन्हें (आनंद शर्मा) को पॉइंट ऑफ ऑर्डर देकर बोलने का मौका दिया था। अगर आप उन्हें बोलने नहीं देते तो, मैं इसके खिलाफ कार्रवाई करूंगा। आपको ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है। ट्रेजरी बेंच का काम यह सुनिश्चित करना है कि सदन की कार्यवाही सही तरीके से चले। मैं पहली बार देख रहा हूं कि ट्रेजरी बेंच खुदकर आकर कार्यवाही बाधित करने की कोशिश कर रही है। मैं बहुत दुखी हूं।’

उपसभापति की इस कठोर टिप्पणी पर प्रतिक्रिया करते हुए नकवी अपनी जगह पर खड़े हुए। उन्होंने कहा, ‘चेयर की तरफ से इस तरह की टिप्पणी…मैं माफी चाहता हूं। हम लोग बहस करना चाहते हैं, परेशानी नहीं खड़ी करना चाहते। हमारे सांसद चाहते हैं कि चर्चा हो और पूरे तथ्यों के साथ हो।’ नकवी को चुप कराते हुए उपसभापति ने कहा, ‘चाहे कैसी भी स्थिति हो, हमेशा पॉइंट ऑफ ऑर्डर के तहत सवाल पूछने का मौका दिया जाता है और उसका जवाब देना होता है। मैं वही कर रहा हूं।’ उपसभापति के यह कहने पर नकवी अपनी जगह पर खड़े हुए और उन्होंने सवालिया अंदाज में पूछा, ‘किस नियम के तहत?’

उपसभापति द्वारा बैठने को कहे जाने पर भी नकवी 2-3 बार यही सवाल पूछते रहे। फिर जब वह अपनी जगह पर बैठे, तब साथी सांसदों को देखकर मुस्कुराने लगे। नकवी के सवाल से नाराज होकर उपसभापति ने बेहद तल्ख अंदाज में हिदायत दी, ‘बैठ जाइए। आप मेरा काम नहीं कर सकते हैं।’ नकवी द्वारा सवाल उठाए जाने पर गंभीर रवैया अपनाते हुए उपसभापति ने उनसे कहा, ‘बैठ जाइए। आप कौन होते हैं यह पूछने वाले कि किस नियम के तहत मैंने उन्हें (आनंद शर्मा) बोलने का मौका दिया, यह मेरा काम है। बैठ जाइए, वरना मैं आपके खिलाफ कार्रवाई करूंगा। आप मंत्री हैं, इस बात से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।’

इसके बाद आनंद शर्मा ने बोलना जारी रखते हुए कहा, ‘देश की मौद्रिक नीतियां तय करने की जिम्मेदारी रिजर्व बैंक के अधिकारक्षेत्र में है, लेकिन 8 नवंबर को प्रधानमंत्री द्वारा नोटबंदी की घोषणा किया जाना इस अधिकारक्षेत्र का उल्लंघन था।’ उनके ऐसा कहने पर उपसभापति ने उनसे यह बताने को कहा कि प्रधानमंत्री के ऐसा करने पर संविधान के किस नियम का उल्लंघन हुआ है। साथ ही, उपसभापति कुरियन संविधान के रेफरेंस बुक को पलटकर यह देखने लगे कि यह आरोप तथ्यात्मक तौर पर कितना सही है। उपसभापति आनंद शर्मा से वह आर्टिकल बताने को कह रहे थे जिसके आधार पर वह आरोप लगा रहे हैं। आनंद शर्मा ने संविधान उठाकर रेफरेंस खोजने लगे। उधर, सत्तापक्ष की ओर एकबार फिर हो-हल्ला शुरू हो गया। उन्हें चुप कराते हुए उपसभापति ने कहा, ‘अगर कोई संवैधानिक नियमों के उल्लंघन की बात कह रहा है, तो मैं जवाब नहीं दूंगा तो कौन जवाब देगा। बताइए मुझे। यह मेरा काम है, मेरी जिम्मेदारी है।’

राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान बीच-बीच में लगातार हंगामा हो रहा था। हंगामे के कारण उपसभापति ने दिनभर के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।





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