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एमपी राज्य सभा चुनाव: किसको कहें बाज़ीगर ?

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भोपाल- मध्य प्रदेश में बीजेपी को लाभ मिला है ! तीन में से दो सीटों पर बीजेपी ने कब्जा जमाया है ! यहां बीजेपी के एमजे अकबर और अनिल माधव दवे को जीत मिली, जबकि तीसरी सीट पर कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार विवेक तन्खा सीट हासिल करने में कामयाब रहे ! बसपा के सहयोग से जीते तन्खा को 62 वोट मिले, जबकि गोटिया के हिस्से 50 वोट ही आए।

वहीं, बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार हार गए। कांग्रेस उम्मीदवार का खेल बिगाड़ने की बीजेपी की कोशिश नाकाम रही। उसके द्वारा अपने नेता विनोद गोटिया को निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उतारना निर्थक रहा। वरिष्ठ पत्रकार एमजे अकबर और प्रदेश बीजेपी नेता एवं रणनीतिकार दवे ने जीत हासिल की।

भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी विनोद गोटिया एवं सत्ताधारी दल बहुजन समाज पार्टी को रिझाने में विफल रहे। चुनाव में तोड़फोड़ और अंतरआत्मा की आवाज का जादू भी नहीं चल पाया। इस हार के पीछे पूर्व संगठन महामंत्री अरविंद मेनन के मैनेजमेंट का न होना भी एक कारण के रूप में देखा जा रहा है।

दो साल से भाजपा के पाले में होने का दावा कर रहे जतारा से कांग्रेस विधायक दिनेश अहिरवार ने भी कांग्रेस का साथ दिया। भाजपा के अनिल माधव दवे एवं एमजे अकबर को 58-58 वोट मिले, पार्टी के शेष 48 वोट गोटिया के पक्ष में गए। उन्हें दो निर्दलीय विधायकों सुदेश राय सीहोर और थांदला के कलसिंह का भी समर्थन मिला।

एक वोट भी नहीं मिला

मंत्रियों को संभागवार जवाबदारी सौंपी गई थी लेकिन सत्ता-संगठन एक भी वोट प्रभावित नहीं कर पाए। चुनाव जिताने में बसपा की 4 सीटों की बड़ी भूमिका थी, लेकिन भाजपा की ओर से बातचीत की पहल नहीं की गई।

गोटिया को लेकर संकोच

भाजपा पदाधिकारियों का कहना है कि बसपा में किससे क्या बात करना है यह पार्टी हाईकमान के कार्यक्षेत्र का मामला था। भाजपा में भी गोटिया को लेकर संकोच बना रहा। नामांकन के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान का बयान था कि गोटिया निर्दलीय प्रत्याशी हैं उन्होंने पार्टी को इसकी सूचना नहीं दी। इसके बाद दूसरा बयान था कि भाजपा ने गोटिया को बची हुई वोट का समर्थन देने का वायदा किया है, पार्टी उनके साथ खड़ी है।

उधर विनोद गोटिया के नज़रिये से देखें तो अगर वो जीतते हैं तो राज्यसभा जाएंगे और अगर हार भी गए तो पार्टी के अंदर उनका कद बढ़ना तय है।

भाजपा और कांग्रेस विधायकों के साथ बीएसपी के चारों विधायकों ने अपने वोट डाले। यह चारों वोट निर्णायक रहे ! विधायका का कहना था बहनजी यानि बसपा प्रमुख मायावती के कहने पर कांग्रेस को वोट दिया है। वोटिंग के दौरान जहां कांग्रेस खेमे में खुशी का माहौल देखा रहा था तो वहीं भाजपा के अनुसार विकास ही परिणाम तय करेगा।

मतदान के लिए भाजपा, कांग्रेस और बसपा व्हिप जारी कर चुके थे। विधायकों की संख्या के आधार पर दो सीटें भाजपा को मिली,वहीं तीसरी सीट पर कोई उलटफेर नहीं हुआ और भाजपा का गोटिया गेम फ़ैल होते हुए कांग्रेस का खता खुला । मतदान की तैयारियों को लेकर विधानसभा में शुक्रवार को रिहर्सल की गई। मतदान में 228 विधायकों ने हिस्सा लिया। देवसर से भाजपा विधायक राजेंद्र मेश्राम को मतदान का अधिकार नहीं मिला है तो नेपानगर से विधायक राजेंद्र दादू का गुरुवार को सड़क हादसे में निधन हो गया है।

कटारे का डाक मतपत्र लेकर अधिकारी मुंबई रवाना

नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे का डाक मतपत्र लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय और रिटर्निंग ऑफिसर कार्यालय के अधिकारी शुक्रवार को मुंबई रवाना हो गए। कटारे मुंबई के एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं और मतदान करने भोपाल नहीं आ सकते हैं। इस आधार पर हाईकोर्ट ने उन्हें डाक मतपत्र जारी करने के निर्देश चुनाव आयोग को दिए थे। डाक मतपत्र मतगणना होने के पहले रिटर्निंग ऑफिसर तक पहुंचना जरूरी है।

तन्खा ने दिया भोज, पहुंचे बसपा और निर्दलीय विधायक

कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए भोज पार्टी को मुख्य जरिया बनाया । गुरुवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव की ओर से भोज दिया गया, तो शुक्रवार को दोपहर में नूर-उस-सबाह में कांग्रेस प्रत्याशी तन्खा ने भोज दिया।

इसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, सांसद कांतिलाल भूरिया, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव, बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजाराम, बसपा विधायकों के साथ सिवनी से निर्दलीय विधायक दिनेश राय भी शामिल हुए।
कांग्रेस के लिए मील का पत्थर साबित होगी यह जीत: कमलनाथ
राज्यसभा चुनाव में मतदान समाप्त होने के बादपूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ ने कहा कि तन्खा की जीत मध्यप्रदेश की राजनीति में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा कि अब एकजुट कांग्रेस विधानसभा से लेकर सड़क तक भाजपा के भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद को जनता के सामने लाएगी।
एक साथ मौजूद रहे कांग्रेसी दिग्गज
कांग्रेस के दिग्गज नेता पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ और सुरेश पचौरी विधानसभा परिसर में एकसाथ मौजूद रहे। तीनों नेता पहले नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे के कक्ष में बैठे रहे फिर विधानसभा उपाध्यक्ष राजेन्द्र कुमार सिंह के चेंबर गए। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव परिसर में पार्टी विधायकों से लगातार संपर्क बनाते रहे।

बिखरने के डर से होटल में कांग्रेस
संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि भाजपा के सामने कोई संकट नहीं है। उसने दो सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किए थे और दोनों पर उसकी जीत तय है। उन्होंने कहा कि मुकाबला कांगेस के विवेक तन्खा और निर्दलीय विनोद गोटिया के बीच है। कांग्रेस की एकता पर उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि पूरी पार्टी बिखने के डर से एक होटल में शिफ्ट हो गई थी।

कुछ तो बदला कांग्रेस में
एक और अहम बात, लगातार नाकामियों के बीच कांग्रेस पर ये आरोप लगते रहे हैं कि मध्य प्रदेश कांग्रेस आलाकमान के राडार पर नहीं है। लेकिन भोपाल में रहकर कमलनाथ की सक्रियता, अपने करीबियों को टिकट दिलवाने वाले क्षत्रपों को जिम्मेदारी सौंपना और एक सीट के लिए सुशील कुमार शिंदे का भोपाल आना ये इशारा करता है कि कांग्रेस में कुछ तो बदला है।

 

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