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अयोध्या में सबसे पहले राम मंदिर का दावा करने वाले महंत नहीं रहे

निर्मोही अखाड़ा के महंत और अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में पक्षकार महंत भास्कर दास का शनिवार तड़के निधन हो गया। वह फैज़ाबाद में निर्मोही अखाड़ा के महंत थे। अयोध्या के तुलसीदास घाट पर आज उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

90 वर्षीय महंत के करीबियों ने बताया कि वह काफी अरसे से बीमार चल रहे थे। अचानक तबीयत खराब होने पर उन्हें फैजाबाद के हर्षण हृदय संस्थान में ऐडमिट कराया गया था। शनिवार सुबह करीब चार बजे के आसपास उन्होंने अंतिम सांस ली। भास्कर दास का इलाज कर रहे डॉ. अरुण कुमार जायसवाल ने बताया कि उनको लकवे का अटैक हुआ। अधिक उम्र होने की वजह से उनकी हालत और नाजुक हो गई थी। उनकी नब्ज भी काफी धीमी चल रही थी। उन्हें बाहर भेजने के लिए सलाह दी गई थी पर वे धार्मिक कारणों से लखनऊ और दिल्ली इलाज के लिए नहीं जाना चाहते थे।

महंत को अंतिम विदाई देने के लिए उनके शिष्य आश्रम पहुंचने लगे हैं। फैजाबाद के सांसद लल्लू सिह और पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डॉ. निर्मल खत्री ने भी उनको श्रद्धांजलि दी।

1959 में अयोध्या राम जन्म भूमि के स्वामित्व का दावा दायर किया था। अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में मुस्लिम पक्षकार हाशिम अंसारी से भी उनके संबध काफी मधुर थे। महंत ने आपसी भाईचारे का हमेशा ध्यान रखा।

भास्कर दास के निधन का नाका हनुमानगढ़ी में साफ असर दिख रहा है। शोक में सभी दुकानें बंद कर दी गई हैं। आरएसएस के उच्च स्तरीय पदाधिकारी डॉ. अनिल मिश्र, राम कुमार राय, डॉ. बिक्रमा प्रसाद पांडे, डॉ. शिव कुमार अम्वेश, अयोध्या के विधायक वेद प्रकाश गुप्त और बीजेपी नेता कमलेश श्रीवास्तव ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

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