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# सीहोर# (ब्यूरो)। बैंक में फर्जी नियुक्तियों के बहुचर्चित मामले में मंगलवार को न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए पूर्व विधायक रमेश सक्सेना, कांग्रेस नेता अभय मेहता, पदेन संचालक भंवरलाल व महाप्रबंधक केके शुक्ला को तीन-तीन साल और फर्जी तरीके से नौकरी पाने वाले 16 कर्मचारियों को दो-दो साल की सजा सुनाई है। इस मामले में आरोपियों ने अपात्रों को फर्जी तरीके से बैंक में नौकरी दी थी। मामला वर्ष 1997-98 का है। उस समय रमेश सक्सेना जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष थे।

इनके अलावा संचालक अभय मेहता, पदेन संचालक भंवरलाल, महाप्रबंधक केके शुक्ला को सजा हुई है। फैसले के बाद सभी आरोपियों को जमानत पर रिहा कर दिया गया है। इधर पूर्व विधायक रमेश सक्सेना का कहना है कि अदालत के फैसले के विरूद्व उच्च न्यायालय में अपील करेंगे।

सहायक जिला अभियोजन अधिकारी देवेन्द्र सिंह ठाकुर के अनुसार वर्ष 1997-98 में जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक से जुड़े एक आर्थिक अपराध के मामले में सीहोर के पूर्व विधायक व जिला सहकारी बैंक के तत्कालीन अध्यक्ष रमेश सक्सेना, अभय मेहता सहित 20 लोगों को आरोपी बनाया गया था। मंगलवार को अपर सत्र न्यायाधीश राकेश श्रोतीय ने इस प्रकरण में 20 आरोपियों को कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है। शासन की ओर से पैरवी उपसंचालक अभियोजन सतीश दिनकर ने की।

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