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समारोहपूर्वक मनाया गया वीरांगना रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस

mandla

मण्डला- वीरांगना रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस एवं श्रद्धांजलि समारोह मण्डला में समारोहपूर्वक मनाया गया। प्रतिमा स्थल पर समारोह आयोजित कर वीरांगना को श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम का आयोजन रानी दुर्गावती प्रतिमा स्थल सर्किट हाउस के सामने रानी दुर्गावती रेवांचल पार्क में किया गया।

कार्यक्रम में रानी दुर्गावती के साथ कुंवर वीर नारायण और मंत्री आधार सिंह कायस्थ की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर नगर सेना एवं पुलिस दल के जवानों द्वारा सलामी दी गई।

मुख्य अतिथि के रूप में सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि वीरांगना रानी दुर्गावती व्यक्तित्व से हमें देश प्रेम के साथ साथ जग कल्याण, सामाजिक समरसता, पर्यावरण एवं जल संरक्षण जैसे सामयिक विषयों की शिक्षा मिलती है। रानी जैसा पराक्रम इतिहास में कहीं अन्यत्र नहीं है। उस समय के सबसे शक्तिशाली राजा से टक्कर ली और वीर गति को प्राप्त हुई। रानी हम सबके लिए प्रेरणा स्त्रोत है। शहीदों की गाथाओं को पढ़ उन्हें आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।


जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमति सम्पतिया उइके ने कहा कि रानी दुर्गावती ने अपनी मातृभूमि की रक्षा और स्वाभिमान के लिये अपने प्राण न्यौछावर कर अमर हो गई। उन्होंने जाति और धर्म से परे देश प्रेम को सर्वोपरि माना। वीरांगना ने अपनी प्रजा की भलाई एवं कला संस्कृति के विकास दिशा में बहुत कार्य किये।

कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष अनिल बाबा मिश्रा ने आव्हान किया कि शहीदों के इतिहास को पढ़कर उनसे प्रेरणा लेना चाहिये। उन्होंने मण्डला नगर के निर्माणाधीन बस स्टेण्ड का नाम वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर कराने की बात कही। उपाध्यक्ष जिला पंचायत शैलेष मिश्रा ने कहा कि रानी दुर्गावती द्वारा जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण की दिशा में किये गये कार्य अनुकरणीय हैं।

गौंडी पब्लिक ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी गिरिजाशंकर अग्रवाल ने रानी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि रानी का जन्म 5 अक्टूबर 1524 को कालिंजर में हुआ था, उनका विवाह 1540 में गढ़ मण्डला के राजकुमार दलपति शाह से हुआ था। सन 1548 में महाराज दलपति शाह की मृत्यु हुई थी, पुत्र वीरनारायण शाह को 3 वर्ष की आयु में सिंहासन रूढ किया गया और उनकी ओर से रानी दुर्गावती ने 16 वर्षों तक राज्य का संचालन किया।

24 जून 1564 को जबलपुर के निकट नर्रई नाला के पास मुगल सेना से घिर जाने के कारण कटार घोंपकर रानी शहीद हो गई। इस अवसर पर विभिन्न कवियों द्वारा वीरांगना की शौर्य गाथा पर कविता पाठ किया गया एवं आदिवासी नर्तक दलों द्वारा मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। रेवांचल पार्क में वृक्ष को रक्षा सूत्र बांधकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया गया।

रिपोर्ट:- @सैयद जावेद अली 




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