बैंकों की एथिकल हैकिंग करा रहा आरबीआई ! - Tez News
Home > Business News > बैंकों की एथिकल हैकिंग करा रहा आरबीआई !

बैंकों की एथिकल हैकिंग करा रहा आरबीआई !

नई दिल्ली- पिछले हछ महीनों में चार सरकारी बैंक साइबर फ्रॉड का शिकार हुए हैं। इसको देखते हुए बैंकिंग रेग्युलेटर आरबीआई ने बैंकों के आईटी सिस्टम्स की एथिकल हैकिंग का फैसला किया है। बैंकिंग रेग्युलेटर इन दिनों एथिकल हैकर्स की टीम बना रहा है, जिसका काम बैंकों की आईटी सिक्यॉरिटी सिस्टम में खामियों का पता लगाना होगा। खबरों के मुताबिक अगर रेग्युलेटर को किसी बैंक का सिस्टम कमजोर मिलता है, वह उसे ठीक करने के उपाय भी बताएगा।

खबरों के मुताबिक ‘RBI साइबर अटैक से बैंकों के साथ ही खुद के बचाव के लिए इंटरनेशनल स्टैंडर्ड अपनाने पर विचार कर रहा है। रेग्युलेटर यह पक्का करने के लिए बैंकिंग सिक्योरिटी सिस्टम की एथिकल हैकिंग, प्लांड और अनप्लांड ऑडिट करने का प्लान बना रहा है कि सभी साइबर सिक्यॉरिटी के बेस्ट तौर-तरीके अपनाएं।’

आरबीआई ने पिछले दो महीनों में एक छोटी टीम बनाई है, जिसका काम खासतौर पर यह पता लगाना है कि किस बैंक के सिक्यॉरिटी सिस्टम में खामी है। इस टीम में यंग एथिकल हैकर और कुछ फॉर्मर पुलिस ऑफिसर हैं। आरबीआई ने पहले से ही एक टीम बनाई हुई है जिसकी अगुवाई रिटायर्ड आईपीएस और बैंक फ्रॉड और टेररिज्म मामलों के विशेषज्ञ नंदकुमार सरवडे कर रहे हैं। आरबीआई ने कई मौकों पर बाहर के एक्सपर्ट्स की भी सलाह ली है।

एथकिल हैकिंग है क्या?
इसका मेन आइडिया रियल हैकर जैसे सोचना और काम करना होता। इनका काम नुकसान पहुंचाने के मकसद से खामियों का फायदा उठाने के बजाय उनको दुरुस्त करने का रास्ता बताना होता है। वित्त मंत्रालय के डेटा के मुताबिक देश के टॉप 51 बैंकों को अप्रैल 2013 से नवंबर 2016 के दौरान 485 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। इसमें से 56 पर्सेंट का नुकसान नॉन बैंकिंग चोरी और कार्ड क्लोनिंग के चलते हुआ था।

मोटे अनुमान के मुताबिक देश में हर घंटे कम से कम 15 रैंसमवेयर हमले होते हैं और हर तीन में एक इंडियन इसका शिकार हो जाता है। इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि हाल के समय में साइबर सिक्योरिटी को लेकर बहुत ऐक्टिव हैं, लेकिन इस मामले में उनको बहुत दूर तक जाना है।

भारत का क्या हाल?
लूसिडियस टेक के सीईओ साकेत मोदी कहते हैं, ‘साइबर सिक्यॉरिटी पर खर्च के मामले में अमेरिकी बैंकों के सामने डोमेस्टिक बैंक कहीं नहीं ठहरते। सोफिस्टिकेटेड साइबर अटैक से निपटने के मामले में अमेरिकी बैंकों जितनी मैच्यॉरिटी आने में बहुत वक्त लगेगा। लेकिन जहां तक दूसरी इंडस्ट्री से तुलना की बात है तो मैन्युफैक्चरिंग, हॉस्पिटैलिटी और हेल्थकेयर जैसी इंडस्ट्रीज के मुकाबले बैंकिंग सेक्टर उनसे बहुत मैच्योर है। इन इंडस्ट्रीज में साइबर सिक्योरिटी पर फोकस बहुत कम है।’ [एजेंसी]




loading...
Copyright @teznews.com. Designed by Lemosys.com