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अपनी-अपनी सुविधा व धंधे के हिसाब से पढ़िए व समझिए….

बाबा भारती की कहानी याद आती है जब एक डाकू उनके घोड़े को हथियाना चाहता है, वह बाबा भारती का घोड़ा मांगने जाता है लेकिन बाबा उससे क्षमा मांगते हुए घोड़ा देने से मना कर देते हैं। घोड़ा पाने के लालच में वह साधु वेश धारण करता है और पुनः बाबा भारती के पास पहुँचता है। बाबा एक साधु को देखकर प्रसन्न होते हैं और उसे कुछ भिक्षा देना चाहते हैं लेकिन डाकू से वेश बदले साधू कहता है कि वह इस घोड़े की सवारी करना चाहता है। बाबा भारती उसे अपने साथ घोड़े पर बैठा कर साधु रूपी डकैत को घुमाने निकलते हैं। थोड़ी दूर जाते ही डकैत वास्तविक रूप में आता है और बाबा भारती को घोड़े से गिरा देता है। घोड़ा लेकर भागते डकैत से बाबा भारती कहते हैं- तुम मेरा घोड़ा ले जा रहे हो ले जाओ लेकिन किसी को यह नहीं बोलना कि तुमने साधुवेश में घोड़ा चुराया है। डकैत यह सुनकर रूक गया और पूछा- ऐसा क्यों कह रहे हो? बाबा भारती ने कहा- लोगों का साधुओं व भिक्षुओं पर से विश्वास उठ जाएगा। यह कह कर बाबा भारती वापस चल पड़े और डकैत घोड़ा लेकर निकल गया।

…..यह कहानी इसलिए स्मरण हो आई कि कल एक वास्तविक गंगा पुत्र मां गंगा की निर्मलता का संकल्प लेकर उनकी ही गोद में समां गया। …जब कि एक और ‘गंगा पुत्र’ जो तमाम झूठ, मक्कारी की भावभंगिमा से सुशोभित है उसके पास भागीरथी पुत्र (स्व0 जी0डी0 अग्रवाल) के चार खतों का जवाब देने तक का वक्त नहीं रहा। एक इनटेक्स कंपनी ने बहुत ही कम पैसे में एक तकनीक के जरिए गंगा के एक बहुत ही छोटे से हिस्से को साफ करने का सफल डिमास्ट्रेशन किया था, लेकिन उस कंपनी के सुझाव व डिमास्ट्रेशन को किनारे कर दिया गया क्योंकि उससे गंगा जरूर साफ हो जाती लेकिन उससे बड़ी-बड़ी कंपनियों के अरबों रूपए के वाॅटर ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगते….ये प्लांट लगेंगे तभी तो लगाने वालों के घरों में रौशनी होगी……दिल्ली में भी 21 या 22 (किसी के पास सही संख्या हो तो कृपया सुधार कर लें ) ऐसे ही प्लांट लगे हैं लेकिन उनमें से चलती हुई हालत में एक या दो हैं।

यमुना नदी की हालत इतने ट्रीटमेंट प्लांट के बाद क्या है मुझे नहीं लगता कि इस पर लिखा जाए। ….दुख व पीड़ा इसी बात की है कि जिस पर सबसे ज्यादा देश ने भरोसा किया वह इस बाबा भारती (यानी भारतीय जनता का) के घोड़े (यानी विश्वास का) का चोर (—-) निकला…..(अश्रुपूर्ण श्रृद्धाजंलि असली गंगा पुत्र को)………चलते-चलते एम्स श्रृषीकेश का निदेशक डाॅ0 रविकांत, इसके खिलाफ लखनऊ के KGMC के कुलपति पद पर रहते हुए भ्रष्टाचार के तमाम आरोप लगे …कल इस आदमी की एक बाइट उसकी फूहडता की बानगी है ।

यह व्यक्ति गंगापुत्र का शरीर जनता के दर्शन के लिए एक दिन एक लिए भी नहीं देना चाहता था क्योंकि गंगा को प्यार करने वाली सरकार नहीं चाहती थी कि कोई बड़ा आंदोलन खड़ा हो। यह रविकांत घटिया स्तर पर उतर कर एक चैनल को बाइट देता है कि- प्रो0 जी0 डी0 अग्रवाल ने देहदान कर दिया था इसलिए उसे हम दर्शन के लिए नहीं रख सकते।………एक बात और गंगा-यमुना जैसी नदियाँ जब मिटेंगी, तो उनके नाम पर माल-पद-प्रतिष्ठा कमाने वाले भी लाश होंगे और उनके भी बच्चों का जनाजा निकलेगा क्यों कि पानी सभी की समान जरूरत है।

लेखक :- पवन सिंह
(लेखक पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक)

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