हिंदू समाज को बांटा जा रहा, हिंदुओं के खिलाफ हो रहा कपट युद्ध – भागवत

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प्रयागराज कुंभ में गुरुवार से शुरू हुए विश्व हिंदू परिषद् के धर्म संसद में केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का मुद्दा उठा।

धर्म संसद में यह प्रस्ताव पास हुआ कि सबरीमाला मुद्दे को अयोध्या आन्दोलन की तरफ उठाया जाएगा।

विहिप की धर्म संसद में पहुंचे आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने कहा कि षड्यंत्र के तहत हिंदू समाज को बांटा जा रहा है, हिंदुओं के खिलाफ कपट युद्ध हो रहा है।

उन्होंने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया।

धर्म संसद में मोहन भागवत ने कहा कि सबरीमाला सिर्फ मलयालम भाषी के भगवान नहीं हैं। पूरा हिंदू समाज उनके साथ है।

सुप्रीम कोर्ट ने हिंदुओं की आस्था का ध्यान नहीं रखा। वोटो की राजनीति हो रही है, महाराष्ट्र का आंदोलन गवाह है। राजनीति करने वाले समझ लें कि आंबेडकर के अनुयायी हम भी हैं। हिंदुओं को चेतना होगा।

धर्म संसद में बोलते हुए भागवत ने कहा कि करोड़ों हिन्दुओं की भावनाओं के साथ खेला जा रहा है। कुछ राजनैतिक दल वोट की सियासत की वजह से हिंदुओं के साथ कपट युद्ध कर रहे हैं। हमें हिंदुओ को जागरूक करना होगा।

भागवत ने कहा, ”कोर्ट ने कहा कि महिला अगर प्रवेश चाहती है तो करने देना चाहिए, अगर किसी को रोका जाता है तो उसको सुरक्षा देकर जहां से दर्शन करते हैं वहां ले जाना चाहिए। लेकिन कोई जाना ही नहीं चाह रहा है। इसलिए श्रीलंका से लाकर लोगों को पीछे के दरवाजे से घुसाया जा रहा है।”

भागवत ने कहा कि सबरीमाला प्रकरण में कोर्ट के फैसले में हिंदुओ की भावनाओं का सम्मान नहीं किया गया, जिसकी वजह से हिंदू आंदोलित हो रहा है।

उन्होंने कहा कि सबरीमाला के मुद्दे पर फैसला देते हुए कोर्ट ने करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं का विचार नहीं किया। उन्होंने कहा कि भगवान अयप्पा के चार मंदिर हैं, सिर्फ एक ही ब्रह्मचर्य रूप में है। महिला का प्रवेश न करना वहां की परंपरा है।

धर्म संसद में मोहन भागवत ने कहा कि सबरीमाला सिर्फ मलयालम भाषी के भगवान नहीं हैं। पूरा हिंदू समाज उनके साथ है।

सुप्रीम कोर्ट ने हिंदुओं की आस्था का ध्यान नहीं रखा। षड्यंत्र के तहत हिंदू समाज को बांटा जा रहा है, हिंदुओं के खिलाफ कपट युद्ध हो रहा है। वोटो की राजनीति हो रही है, महाराष्ट्र का आंदोलन गवाह है। राजनीति करने वाले समझ लें कि आंबेडकर के अनुयायी हम भी हैं। हिंदुओं को चेतना होगा।