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इसलिए नहीं मिलती मुसलमानों को नौकरी, RTI में खुलासा

jobsनई दिल्ली- आईटीआई की मदद से मुसलमानों की सरकारी नौकरी को लेकर मिनस्टरी ऑफ़ आयुष की और से एक नया खुलासा सामने आया है ! मामला यह है मोदी सरकार के मंत्रालय आयुष के मुताबिक सरकार की नीति के अनुसार हम मुसलमानों को रीकोरोटे नहीं करते हैं ! यह बात एक आरटीआई के जवाब में मंत्रालय आयुष ने दिया।

आरटीआई में सवाल था कि पिछले साल वर्ल्ड योगा दिवस में देश से बाहर भेजे गए योग टीचर्स /टरीनर में से कितने मुसलमान थे। जिसका जवाब आयुष मिनस्ट्री ने दिया है यह दुखद तथ्य प्रसिद्ध खोजी पत्रकार पुष्प शर्मा की विशेष रिपोर्ट में खुलासा हुआ है। इस की पूरी रिपोर्ट मिल्ली गैज़ेट के आने वाले अंक में आ रहा है।

यह जानकारी प्राप्त करने के लिए शर्मा ने एक के बाद एक कई आरटीआई आवेदन मंत्रालय आयूश में प्रवेश किया। तंग आकर मंत्रालय आयूश ने इस बात को स्वीकार किया कि उसने किसी मुसलमान को विश्व योग दिवस 2015 के लिए बतौर योग टैचर/टरीनर रिकरोट नहीं किया था। मंत्रालय आयूश ने अपने जवाब में बताया कि इस पोस्ट के लिए 711 मुसलमानों ने आवेदन किया था लेकिन किसी को न साक्षात्कार के लिए बुलाया गया और न ही किसी को रिकरोट किया गया, जबकि 26 (सभी हिंदू) योग शिक्षकों को देश के बाहर उक्त काम के लिए भेजा गया। मंत्रालय आयूश ने यह भी बताया कि योग टैचर/टरीनर के पदों के लिए अक्टूबर 2015 तक 3841 मुसलमानों ने आवेदन भरा लेकिन किसी मुसलमान का चयन नहीं हुआ।

आरटीआई आवेदन के जवाब में मंत्रालय आयूश ने मुसलमानों को रिकरोट न करने का कारण बताते हुए कहा है : ” सरकार की नीति के अनुसार किसी मुसलमान को नहीं बुलाया गया, न सीलैक्ट किया गया और न ही बाहर भेजा गया। ” मंत्रालय आयूश प्रतिक्रिया से यह भी स्पष्ट हुआ कि देश के अंदर भी किसी मुसलमान को योग टैचर/टरीनर के लिए चयन नहीं किया गया हालांकि इसके लिए 3841 मुसलमानों ने आवेदन दिया था।

इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए शर्मा ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है: ” यह बात हर विशेष व आम के ज्ञान में है ,मोदी सरकार की नीतियों के कारण देश में सांप्रदायिक घृणा असाधारण हद तक बढ़ चुकी है हालांकि इस बात को साबित करना बहुत मुश्किल है। यहाँ, वर्तमान सरकार के इतिहास में पहली बार हो रहा है कि एक मंत्रालय एक आरटीआई के जवाब में बड़ी बेशर्मी के साथ लिख कर बता रही है कि वह एक तय पोस्ट के लिए किसी मुसलमान को रिकरोट नहीं किया।

यह जवाब आरटीआई के एक जवाब में मिला। जो इस सेक्युलर मुल्क के सेक्युलर लोगों को झिझोंड कर रख देगा कि किस तरह से हर जगह भगवा करण का खेल खेला जा रहा है और मुसलमानों के लिए रोजी रोटी के ज़राए की ज़मीन को तंग किया जा रहा है ! इस जवाब में वर्णन से बताया गया है कि 3841 मुसलमानों ने योग प्रशिक्षक / टीचर के पदों के लिए आवेदन किया है, उनमें 711 मुसलमान भी शामिल हैं जिन्होंने बाहर जाकर योग की शिक्षा देने के लिए आवेदन किया लेकिन इनमें से किसी का चयन नहीं हुआ। और इसलिए हमें यह बताया गया है कि यह सरकार की नीति के अनुसार हुआ है क्योंकि सरकार मुसलमानों को रिकरोट नहीं करना चाहती। निश्चित रूप से यह जवाब एक छोटी सी मंत्रालय में एक तय योजना के बारे में था, लेकिन आप खुद सोच सकते हैं कि इस नीति के बड़े प्रभाव पूरी सरकार में किसी तरह सेट हो रहे होंगे।




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