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गोद लिए गांवों में मौत जैसी जिंदगी जीने को मजबूर ग्रामीण

Rural villages, forced to live life like the death of adoptionकैथल – पाई क्षेत्र का गांव नरड, जिस अधिकारी के द्वारा गोद लिया गया, उसी अधिकारी के विभाग के द्वारा लोग मौत की जैसी जिंदगी जीने को मजबूर है। उल्लेखनियां है कि प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा नेताओं, अधिकारियों को निर्देश दिये कि गांव के विकास के लिये एक- एक गांव को गोद ले। गांव को गोद लेकर उस गांव में जाकर उसकी हर समस्या का समाधान किया जाये। अधिकारियों के द्वारा गांव को गोद लेने की घोषणा तो कर दी गई। यह घोषणा मात्र कागजी घोषणा बन कर रह गई।

इस गांव नरड को शुगर मिल की प्रबन्धक निदेशिका सुभिता ढ़ाका के गोद लिया गया। गोद लेने के बाद से इस अधिकारी के द्वारा ग्रामीणों की कोई सुध- बुध नही ली गई। ग्रामीण धर्मेन्द्र चहल, महेन्द्र, राजु, आदि ग्रामीणों ने बताया कि शुगर मिल से हर रोज धुआं निकलता है। इस धुयें से दिन के समय तो इतना ज्यादा पता नही चलता, परन्तु रात को इससे बाहर रखें हुये कपड़े, समान आदि पर धुयें के कण चिपके हुये होते है। जिससे कपड़े, समान आदि सभी पर काली छाई से काले हो जाते है। यह धुआं मनुष्य के शरीर में भी जाता है, जिससे गांव में दमा, कैंसर, जुकाम, तपेदिक आदि अनेक बिमारीयां फैल रही है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन तथा प्रदेश सरकार से मांग की है कि उनको इस समस्या से मुक्ति दिलवाई जाये।

यदि ग्रामीणों कोई समस्या है, तो ग्रामीण आकर उनको बताये- ढ़ाका
इस बारे में शुगर मिल की प्रबन्धक निदेशिका सुभिता ढ़ाका ने बताया कि ग्रामीण उनको अवगत करवाये। ध्यान दिया जायेगा।

धुयें से फैलती अनेक बीमारियां- सी एम ओ
इस बारे में कैथल के सी एम ओ आदित्य स्वरूप गुत्ता ने बताया कि इस धुयें में गन्ने के छोटे- छोटे कण के साथ -साथ धुयें में भी अनेक कण होते है। जो मनुष्य के अन्दर जाकर जम जाते है। बेनोसिसयश आदि जैसी अनेक गम्भीर बीमारियां फैलती है। इससे दमा, कैंसर, जुकाम, तपेदिक, लकवा आदि कई किस्म की बीमारियां फैलती है। ग्रामीणों की जिंदगी बचाने के लिये प्रबन्ध करने जरूरी है।

रिपोर्ट :- राजकुमार अग्रवाल

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