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सलमान नदवी मस्जिद का दावा छोड़ने के बदले में 5 हजार करोड़ चाहते थे

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के एग्जीक्यूटिव मेंबर रहे सलमान नदवी पर अमरनाथ मिश्रा ने बड़ा आरोप लगाया है. मिश्रा का कहना है कि नदवी मस्जिद का दावा छोड़ने के बदले में 5 हजार करोड़ की डील चाहते थे.

श्री श्री रविशंकर और आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के चेयरमैन मौलाना सलमान नदवी के बीच हुई बैठक से माहौल में तल्खी आ गयी है. नदवी ने बैठक कर मंदिर बनाने का रास्ता सुझाया था जिसके बाद ओवैसी ने नदवी पर कौम के साथ धोखा करने का आरोप लगते हुए उन्हें चेयरमैन के पद से बाहर का रास्ता दिखा दिया था.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अब मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के एक पूर्व सदस्य ने यह बयान देकर सनसनी मचा दी है कि उस मुलाकात में एक गुप्त डील की गयी थी जिसमे राम मंदिर बनाने का फार्मूला था.

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के एग्जीक्यूटिव मेंबर रहे सलमान नदवी पर अमरनाथ मिश्रा ने बड़ा आरोप लगाया है. मिश्रा का कहना है कि नदवी मस्जिद का दावा छोड़ने के बदले में 5 हजार करोड़ की डील चाहते थे.
राम जन्मभूमि सद्भावना समिति के अध्यक्ष और श्रीश्री रविशंकर के सबसे करीबी अमरनाथ मिश्रा ने आरोप लगाया है कि जिस फार्मूले को लेकर सलमान नदवी और सुन्नी सेंट्रल बोर्ड के अध्यक्ष श्रीश्री रविशंकर से मिलने गए थे. उस फार्मूले के पीछे एक बड़ी डील करने की तैयारी थी.

अमरनाथ मिश्रा ने कहा कि यह फार्मूला दरअसल उन्ही का था जो उन्होंने 5 फरवरी को मौलाना नदवी और दूसरे मुस्लिम नेताओं को दिया था लेकिन उसी मुलाकात के दौरान सलमान नदवी ने इस डील की एवज में 5000 करोड़ रुपए, अयोध्या में 200 एकड़ जमीन और राज्यसभा की एक सीट मांगी थी. अमरनाथ मिश्रा के मुताबिक यह पेशकश इसलिए की गई ताकि नदवी की यह बात मंदिर निर्माण से जुड़े बड़े लोगों, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक पहुंचाई जा सके और किसी तरह यह डील पक्की हो सके.

अमरनाथ मिश्रा ने कहा, ‘मंदिर निर्माण के आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट का फार्मूला लेकर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कई सदस्यों के पास गए थे. उन्होंने यह फार्मूला सलमान नदवी को भी दिया था, ताकि इस पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में चर्चा हो सके इस चर्चा का भरोसा सलमान नदवी ने अमरनाथ मिश्रा को भी दिया था.’

मिश्रा का दावा है कि इस मामले पर बोर्ड में चर्चा करने के बजाए सलमान नदवी इस फार्मूले को लेकर सीधे श्रीश्री रविशंकर के पास चले गए और वहां से उन्होंने इस फार्मूले का ऐलान कर दिया जोकि तय किये गये मानको के विपरीत था.

अमरनाथ मिश्रा ने अपना पक्ष मजबूत करते हुए कहा कि उन्हें जानकारी मिली कि इस डील की जानकारी श्री को दी वह भी अपने बोर्ड में बिना सलाह मशविरा किये, इस बात का मेरे पास सबूत है.

उधर, नदवी ने मिश्रा के इस दावे को खारिज कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मिश्रा इस तरह के मुद्दे उठाकर हिंदुओं और मुसलमानों के बीच तनाव बरकरार रखना चाहते हैं। नदवी ने कहा, ‘इस तरह के लोग नहीं चाहते कि अयोध्या में राम मंदिर या मस्जिद बने। वह शैतान हैं और उनका एक मात्र काम ईश्वर के कार्य में तनाव पैदा करना है। वह इस बात से भयभीत हैं कि हिंदू और मुस्लिम एकजुट हो जाएंगे। वह जानते हैं कि मैं अकेला ऐसा शख्स हूं जो यह मुद्दा उठा रहा हूं।

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