एकदूसरे को धर्म के संकीर्ण चश्मे से नहीं देखें – संजय खान

संजय खान ने इस मौके पर कहा, ‘भारतीय मुसलमान के तौर पर हमें गर्व की अनुभूति होनी चाहिए। सशक्तिकरण और जिम्मेदारी का भाव होना चाहिए क्योंकि दुनिया के सभी मुस्लिमों के लिए हम उपलब्धिके दिशासूचक की ओर मार्ग प्रशस्त करते हैं। हम अपनी मातृभूमि पर पराए नहीं हैं, हम इस मिट्टी के बेटे और बेटी हैं।’

बॉलीवुड एक्टर और फिल्ममेकर संजय खान ने सभी भारतीयों से अनुरोध किया है कि वे एकदूसरे को धर्म के संकीर्ण चश्मे से नहीं देखें।

उन्होंने कहा कि सरकार को ‘अल्पसंख्यक’ शब्द का इस्तेमाल बंद करना चाहिए। संजय खान ने ‘अस्सलामुअलैकुम वतन’ नाम की अपनी नई किताब के विमोचन के अवसर पर सोमवार को यह कहा।

संजय खान ने इस किताब में भारत की विरासत को आकार देने में मुस्लिमों की भूमिका पर प्रकाश डाला है और भारतीय मुस्लिमों को मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया है।

संजय खान की किताब का विमोचन महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख और राज्य के चिकित्सा शिक्षा एवं संस्कृति मंत्री अमित देशमुख ने किया।

संजय खान ने इस मौके पर कहा, ‘भारतीय मुसलमान के तौर पर हमें गर्व की अनुभूति होनी चाहिए। सशक्तिकरण और जिम्मेदारी का भाव होना चाहिए क्योंकि दुनिया के सभी मुस्लिमों के लिए हम उपलब्धिके दिशासूचक की ओर मार्ग प्रशस्त करते हैं। हम अपनी मातृभूमि पर पराए नहीं हैं, हम इस मिट्टी के बेटे और बेटी हैं।’

इस मौके पर राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि खान धर्मनिरपेक्ष भारत की विचारधारा को आगे लेकर गए हैं।

संजय खान की यह दूसरी किताब है। संजय खान इससे पहले अपनी आत्मकथा भी लिख चुके हैं।