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स्कूल-कॉलेज, व कोचिंग में चल रहा खुले आम इश्क

Schools, colleges, and coaching  running openly loveसिवनी [ TNN ] मां-बाप अपने बच्चों को स्कूल, कॉलेज व कोचिंग क्लॉस सिर्फ इसलिए भेजते हैं ताकि उनका खून अच्छी से अच्छी शिक्षा प्राप्त कर काबिल बन सके लेकिन इन दिनों देखा जा रहा है कि पाठशालाओं में अब शिक्षा नहीं बल्कि मस्तियां की जा रही है। हम बात कर रहे नगर के बीचो-बीच स्थित एक ऐसे स्कूल की जहां हॉफ छुट्टी में प्रेमियों के मिलन का दौर शुरू होता है और यहां के छात्र स्कूल में ही अपनी जवानी का लुत्फ उठाते हैं। हम इस स्कूल का नाम इसलिए प्रकाशित नहीं कर रहे हैं चूंकि इस स्कूल में सभ्य एवं अच्छे परिवार के छात्र पढ़ते हैं और यह स्कूल काफी पुराना व जाना जाने वाला है लेकिन जनता समझदार है, वह तो समझ गई होगी।

 नगर में इन दिनों गली-गली कोचिंग सेंटर खुल गये हैं जहां पढ़ाई कम इश्क मिजाजी ज्यादा चल रहे हैं। कोचिंग सेंटर लगाने वाले मास्साब को यह नहीं पता होता कि उनकी ट्यूशन से जाने के बाद बच्चे कहां जाते हैं और न ही उन्होंने छात्रों से पूछने की जहमत उठाई? चूंकि वह तो इतने व्यस्त होते हैं कि एक के बाद दूसरी ट्यूशन शिफ्ट चालू हो जाती है। ट्यूशन से निकलकर छात्र अपने अपने जुगाड़ में लग जाते हैं और फिर शुरू होता है मेल-मिलापों का दौर, चाय कॉफी, रेस्टारेंट और गलत कामों का दौर जिनसे उनके परिजन भी अनजान है।

हम इस समाचार से केवल बच्चों को पालकों को आगाह कराना चाहते हैं कि वे अपने बच्चों पर पैनी नजर रखें चूंकि अक्सर जवानी की सीढ़ी में कदम रखते ही बच्चों के पैर बहकने लगते हैं।

वहीं हमारे नगर में तो एक ऐसा स्कूल भी हैं जहां के छात्र क्लॉस में ही छुट्टी होने पर मुंह से मुंह मिलाने का कार्यक्रम शुरू कर देते हैं जिनसे यहां के प्रिंसीपल व शिक्षक भी अनजान है। प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो सुबह लगने वाले इस स्कूल के छात्र अक्सर स्कूल समय में डे्रस पहने हुए सूनसान कालोनी व गलियों में आसानी से देखे जाते हैं। हमारे एक पाठक ने तो इस स्कूल के छात्र की एक रंगमिजाजी फोटो भी अपने कैमरे में कैद कर ली है लेकिन हम उसे कतई प्रकाशित नहीं करेंगे चूंकि हमारा उद्देश्य किसी को बदनाम करना नहीं है।

बहरहाल यदि शिक्षा विभाग इन तमाम पहलुओं में कोई शीघ्र निर्णय नहीं लेता है तो कोई बड़ी अनहोनी घटना सामने आ सकती हैं। अब जवाबदारी सिर्फ स्कूल प्रबंधन व छात्रों की पालकों की है कि वे अपने बच्चों पर कितनी नजर रखते हैं वहां उन्हें एक दिन कोई बुरी खबर सुननी पड़ सकती हैं।

:-अखिलेश दुबे

 

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