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गोरक्षा के नाम पर तीन लोगों की पिटाई, पांच आरोपित गिरफ्तार

सिवनी : डूंडासिवनी थाना क्षेत्र में गोमांस परिवहन के शक में एक महिला व दो युवकों से मारपीट करने के आरोपित पांच लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

घटना 22 मई की है, लेकिन मारपीट का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने अन्य आरोपितों पर कार्रवाई की।

पुलिस अधीक्षक ललित शाक्यवार ने पत्रकार वार्ता में बताया कि सोशल मीडिया पर मारपीट का वीडियो वायरल होने का मामला सामने आते ही पुलिस ने पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया।

उन्होंने बताया कि 22 मई की सुबह डूंडासिवनी थाना पुलिस को मंडला मार्ग से कुछ लोगों द्वारा गोमांस के परिवहन की सूचना मिली थी। पुलिस ने मामले में एक महिला व दो युवकों को गिरफ्तार किया था।

मप्र गोवंश प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर आरोपितों को पुलिस ने उसी दिन 22 मई को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था।

मारपीट का वीडियो कर दिया था वायरल

इस मामले में 23 मई को सोशल मीडिया पर गोमांस ले जाने के शक में पकड़े गए आरोपितों से कुछ लोगों द्वारा मारपीट का वीडियो सामने आया।

पुलिस ने इस वीडियो को सोशल मीडिया से हटवा दिया है। मारपीट करने वाले पांच आरोपितों शुभम बघेल (25) निवासी कबीर वार्ड, योगेश उइके (19) निवासी बोरदई, दीपेश नामदेव (31) शुक्रवारी, रोहित यादव (22) कबीर वार्ड, श्यामलाल डहेरिया (43) मानेगांव को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

छानबीन के दौरान शुभम बघेल की कार से बगैर लायसेंस की एक एयरगन भी पुलिस ने जब्त की है।

25 आर्म्स एक्ट के अलावा धारा 341, 294, 323, 147, 148, 149, 327, 354, 34 भादवि के तहत प्रकरण दर्ज कर सभी आरोपितों को पुलिस ने शनिवार दोपहर सीजेएम कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

सोशल नेटवर्किंग साइट पर घटना को तोड़मरोड़ कर समाज में विद्वेष की भावना से भ्रम फैलाने और आपत्तिजनक टिप्पणी करने वालों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के आदेश कलेक्टर प्रवीण सिंह ने जारी किए हैं।

कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी प्रवीण सिंह ने दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 (2) के तहत आदेश जारी कर सोशल मीडिया पर व्यक्ति व व्यक्तियों के समूह पर आपत्तिजनक टिप्पणी व भ्रामक प्रचार को प्रतिबंधित किया है।

आदेश में सोशल नेटवर्किंग साइट व अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर व्यक्ति या व्यक्तियों के समूहों के संदर्भ में अनर्गल, अशोभनीय व तथ्यों से परे टिप्पणी करने व समाज में विद्वेष की भावना उत्पन्न् करने वालों को प्रतिबंधित करते हुए कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया है।

यह आदेश 7 जून तक लागू रहेगा। इस आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

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