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हजरत अली की शहादत पर निकला जुलूस

 

Shahdat Hazrat Ali 21 Ramzan at Lucknowलखनऊ [ TNN ] पुराने शहर में रविवार को 21वीं रमजान का जुलूस गमजदा माहौल में अकीदत और एहतराम के साथ निकला। जुलूस में बड़ी तादाद में लोग शामिल हुए। गमगीन माहौल में सभी रौजा-ए शबी नजफ से कर्बला तालकटोरा पहुंचे। रास्ते में याली मौला और हैदर मौला की सदाओं से माहौल गमगीन हो उठा। अकीदतमंद अमीरउल मेनीन हजरत अली अलैहिस्सलाम के ताबूत को आगे बढ़चढ़ कर बोसा दे रहे थे। इस जुलूस के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

हजरत अली की शहादत का जुलूस सुबह मौलाना मीसम जरवली द्वारा मजलिस के बाद शहर के मातमी अंजुमन नौहाख्‍वानी और सीनाजनी करते हुए चले। इनमें पुरूषों के साथ महिलाओं की भारी तादाद थी। लोगों ने बताया कि‍ ऐसा महसूस हुआ कि 21वीं रमजान सन 40 हिजरी में इराक स्थित मस्जिदे कूफे में पहुंच गए हैं। यह शबीह ताबूत न होकर हजरत अली अलैहिस्सलाम का जनाजा है। 

घर की छतों से भी लोग कर रहे थे जियारत

जुलूस के दौरान हर तरफ गमगीन अकीदतमंद क़मा (तलवार) का मातम और जंजीर से खुद को पीटते हुए जा रहे थे, ताकि उस समय हुई दर्द को महसूस कर सकें। इसमें क़मा से सिर पर वार किया जाता है। कुछ लोग जंजीरों से पीठ पर वार कर खुद को लहूलुहान कर रहे थे। जुलूस जहां से निकल रहा था, लोग अपने घरों की छत से भी जियारत कर रहे थे। 

महिलाएं सौंपती हैं ताबूत

उन्नीस रमजान की सुबह से पुरुषों के दर्शन करने की व्यवस्था रहती है। 20 रमजान को 11 बजे से सिर्फ महिलाओं के दर्शन करने का इंतजाम किया जाता है, जो 21 रमजान की सुबह तक जारी रहता है। इसके बाद यहां अलविदाई मजलिस होती है, फिर महिलाएं ताबूत को रौजे से निकाल कर पुरुषों के सुपुर्द कर देती हैं। यह ताबूत जुलूस की शक्ल में विभिन्न रास्तों से गुजरता हुआ कर्बला तालकटोरा जाता है। वहां इसे बड़ी अकीदत के साथ दफन किया जाता है।

स्पेशल रिपोर्ट – सैय्यद रिज़वान मुस्तफ़ा 

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