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शिवसेना ने कहा- कमजोर-स्वार्थी नेतृत्व का नतीजा है दलित हिंसा

नई दिल्ली : बीजेपी की सबसे पुरानी राजनीतिक सहयोगी रही शिवसेना ने एक बार फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। शिवसेना ने बुधवार को कहा कि हाल ही में दलितों द्वारा बुलाए गये भारत बंद के दौरान हुई हिंसा कमजोर’ और स्वार्थी नेतृत्व को दर्शाती है। पार्टी के मुखपत्र सामना में लिखे गए संपादकीय में देश को जाति के नाम पर तोड़ा जा रहा है, मोदी जी क्या कर रहे हैं?

शिवसेना ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए लिखा कि, ‘जब नेतृत्व कमजोर और स्वार्थी हो जाता है तब हिंसा की ऐसी घटनाएं होती हैं। देश को एक बार धर्म के नाम पर विभाजित किया गया था।अगर इसे जाति के नाम पर एक बार फिर तोड़ा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी कहां है?’ सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी/ एसटी( अत्याचार निवारण) कानून के कुछ प्रावधानों को हल्का करने का विरोध कर रहे दलित संगठनों ने सोमवार को भारत बंद बुलाया था।

संपादकीय में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ सड़कों पर उतर आना डॉ बाबासाहेब अंबेडकर की विचारधारा के खिलाफ जाने जैसा है। चुनाव जीतने के लिए दंगों के सहारे समाज को तोड़ना राजनीतिक भ्रष्टाचार है। नीरव मोदी ने देश को लूटा, जबकि मौजूदा सरकार देश को तोड़ रही है। संपादकीय में कहा गया कि कि गिरफ्तारी से पहले जांच करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में गलत क्या है। यह फैसला इसलिए दिया गया कि ताकि इस कानून का गलत इस्तेमाल न किया जा सके।

शिवसेना ने कहा कि 25 साल पहले अयोध्या में व्यापक अशांति फैली थी। जिसमें कई कारसेवकों की जान चली गई थी। आज जब मोदी-शाह सरकार सत्ता में है, लेकिन राम मंदिर का निर्माण अभीतक शुरू नहीं हुआ है। सरकार ने इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट में खींचने के सिवाए राम मंदिर पर कोई फैसला नहीं लिया है। पत्र में कहा गया है कि, देश की राजनीति अब एक खतरनाक चरण में है। नफरत की राजनीति देश को एकजुट नहीं रख सकती।

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