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तानाशाह थी इंदिरा गांधी, आजादी का इतिहास सही नहीं लिखा गया – शिवराज

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भी भाजपा और कांग्रेस के नेता सियासत करना नहीं भूले। मीसाबंदी के सम्मान कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इतिहास पर ही सवाल खड़े कर दिये।

उन्होंने फिर एक परिवार पर आरोप लगाये और पीएम मोदी के साथ गृह मंत्री अमित शाह को नए इतिहास का हीरो बताया।

मध्‍य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीजेपी कार्यालय में मीसाबंदियों को सम्मान किया। इस दौरान उन्होंने मीसाबंदी को मिलने वाली पेंशन बंद करने को लेकर कमलनाथ सरकार पर जमकर निशाना साधा।

उन्‍होंने कहा कि कश्मीर आज खुली हवा में सांस ले रहा है। अब मुद्दा कश्मीर नहीं पीओके है। इतिहास का सातवां स्वर्णिम अध्याय पीएम मोदी और अमित शाह लिख रहे हैं।

साथ ही उन्होंने कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए कहा कि देश उन्नति की तरफ आगे बढ़ रहा है, लेकिन अंधे बहरे देख नहीं पा रहे हैं। एक नरेंद्र दत्त (विवेकानंद) ने संकल्प लिया और दूसरे नरेंद्र ने उसे पूरा किया।

शिवराज सिंह चौहान ने देश के इतिहास पर ही सवाल खड़े कर दिये। उन्होंने कहा कि एक बात की पीड़ा हमेशा रहेगी कि आजादी का इतिहास सही नहीं लिखा गया। ऐसा बताया गया कि आजादी महात्मा गांधी, नेहरू और इंदिरा जी ने दिलाई। जिन्होंने सब कुछ दिया, उन्हें स्थान नहीं मिला। केवल एक परिवार को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया।

हम लक्ष्मीबाई, आजाद, भगत सिंह, बोस, अशफाकुल्लाह, वीर सावरकर जैसे कई शहीदों को भूल गए। उनकी समाधि पर एक दिया नहीं जलता और उनके मकबरे जगमगा रहे हैं जो बेचा करते थे शहीदों के कफन।

उन्होंने कहा कि विकास में बीजेपी सकरात्मक सहयोग करेगी, लेकिन गड़बड़ हुई तो जबरदस्त आंदोलन भी करेंगे। आपातकाल सिर्फ कुर्सी बचाने के लिए लगाया गया। आपातकाल लोकतंत्र का काला अध्याय है।

मीसाबंदी को लेकर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अगर मीसाबंदी न लड़ते तो देश का लोकतंत्र नहीं बचता। इंदिरा गांधी उस वक़्त तानाशाह थीं। हमने इसलिए मीसाबंदियों का सम्मान करना तय किया था। आज मध्य प्रदेश में लोकतंत्र के सैनानियों मीसाबंदियों का अपमान हुआ है।

सरकार को मीसाबंदियों का सम्मान करना चाहिए था। सरकार नहीं कर रही इसलिए हमने तय किया कि उनका सम्मान करेंगे। पूरे प्रदेश में बीजेपी मीसाबंदियों का सम्मान कर रही है। सरकार ने गलत किया तो हमारा ये रचनात्मक विरोध है। हम हर साल करेंगे मीसाबंदियों का सम्मान। जबकि सरकार के सम्मान न करने के फैसले का हम विरोध करते हैं।

इतिहास क्या है और इसकी महत्‍वता कब और कहां होनी चाहिए। यह बात देशवासी अच्छी तरह जानते हैं। अब इसी इतिहास पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। नेता अपनी सियासी रोटी सेक रहे हैं। मौका स्वतंत्रता दिवस का हो या फिर कोई भी, बस इन सियासदानों को अपनी सियासत चमकाने का मौका चाहिए।

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