नई दिल्ली –  चुनाव आयोग के समक्ष पेश हलफनामे में अपनी शैक्षणिक योग्यता को लेकर गलत जानकारी देने के आरोप में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी पर नई दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने जैसे ही सुनवाई के लायक माना, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने फौरन मानव संसाधन विकासमंत्री पद से उनके इस्तीफे की मांग की साथ ही कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता शकील अहमद का कहना है कि अगर ईरानी खुद इस्तीफा नहीं देती हैं तो ये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ज़िम्मेदारी है कि वे उन्हें तुरंत पद से हटाएं।

बताते चलें कि ईरानी के खिलाफ अदालत में यह शिकायत स्वतंत्र लेखक अहमर खान ने दाखिल की थी उन्होंने आरोप लगाया था कि केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने लोकसभा और बाद में राज्यसभा के चुनाव के लिये नामांकन पत्र दाखिल करते समय चुनाव आयोग के समक्ष पेश तीन हलफनामे पेश किये थे, जिनमे उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में अलग अलग ब्यौरा दिया है। शिकायतकर्ता खान की ओर से अधिवक्ता के. के. मनन ने अदालत को बताया कि अप्रैल 2004 में लोकसभा चुनाव के लिए दाखिल अपने हलफनामे में ईरानी ने चुनाव आयोग को दिखाया था कि उन्होंने 1996 में दिल्ली विश्वविद्यालय के पत्राचार से बीए किया, जबकि 11 जुलाई 2011 को गुजरात से राज्यसभा चुनाव के लिए आयोग के समक्ष दाखिल एक अन्य हलफनामे में उन्होंने कहा कि उनकी सर्वोच्च शैक्षणिक योग्यता डीयू के पत्राचार से बीकॉम पार्ट वन है। साथ ही शिकायत में यह भी आरोप था कि 16 अप्रैल 2014 को अमेठी सीट से लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन के वक्त दाखिल हलफनामे में ईरानी ने कहा था कि उन्होंने डीयू के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग से बीकॉम पार्ट 1 पूरा किया है। साथ ही शिकायत में दावा किया गया है, स्मृति ईरानी के उक्त हलफनामों में अपनी शैक्षिक योग्यता के बारे में गलत और भिन्न भिन्न बयान दिया, ऐसा प्रतीत होता है कि अपने स्वामित्व की अचल सम्पत्ति एवं अन्य ब्यौरे के बारे में गलत या भिन्न बयान दिया। इन्हीं आधारों पर शिकायतकर्ता ने कहा था कि इससे साफ है कि केंद्रीय मंत्री ईरानी की ओर से दाखिल तीन में से कोई एक ही हलफनामा सही है अंततः इस मामले पर पटियाला हाउस कोर्ट स्थित मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट आकाश जैन ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने एक जून को केंद्रीय मंत्री ईरानी के खिलाफ दाखिल शिकायत पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था और इस पर फैसला सुनाया गया |

कोर्ट ने कहा है कि ये मामला सुनवाई लायक है और आगामी 28 अगस्त को इस मामले की सुनवाई की जाएगी | फैसला आते ही विपक्षी दलों ने स्मृति इरानी का इस्तीफा मांगने पर अड़ गए हैं विश्वस्त सूत्रों के हवाले से खबर आने लगी है कि इस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जल्द ही कड़ा कदम उठाते ही स्मृति ईरानी को मंत्रिमंडल से बाहर कर सकते हैं | बताते चलें कि पहले भी ईरानी पर अडयल रुख और गलत तरीके से कर्मचारियों के साथ व्यवहार करने पर इनकी शिकायत भाजपा और आर एस एस के नेताओं के की जा चुकी थी |

रिपोर्ट : यासमीन खान / अंशिका तिवारी

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