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सोशल मीडिया को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता

Social media can not be ignored 3लखनऊ – प्रदेश की राजधानी के लखनऊ जनसंचार एवं पत्रकारिता संस्थान स्थित श्री अधीस स्मृति सभागार में एकदिवसीय राष्ट्रीय मीडिया विमर्श का आयोजन “नया मीडिया मंच” और “जर्नलिस्ट, मीडिया एंड राइटर्स फ़ोरम” द्वारा किया गया। इस दौरान ‘नया मीडिया के पत्रकारीय सरोकार’ और ‘वैकल्पिक पत्रकारिता और संभावनाओं का भविष्य’ जैसे विषयों पर सारगर्भित और विस्तार से पारिचर्चा हुई।

कार्यक्रम के दौरान लन्दन प्रवासी प्रसिद्ध ब्लागर और श्रेष्ठ लेखिका शिखा वार्ष्णेय को हिन्दी पत्रकारिता और रचनाधर्मिता को समर्पित सत्यनारायण शुक्ल स्मृति प्रथम श्रम साधना सम्मान-2015 ने नवाजा गया।विमर्श के ‘नया मीडिया के पत्रकारीय सरोकार’ विषयक प्रथम विशेषज्ञ सत्र में बोलते हुए मानवाधिकार आयोग उत्तर प्रदेश के पूर्व सचिव और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रहे . संतोष द्विवेदी ने कहा कि नया मीडिया दरअसल जनोन्मुखी माध्यम है जिसमें किसी भी ख़बर को ख़ारिज नहीं किया जा सकता. मुख्यधारा से कट चुके आम आदमी की आवाज की मुखर अभिव्यक्ति को इसने आवाज़ दी है. लखनऊ जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के निदेशक अशोक कुमार सिन्हा ने कहा कि पत्रकारिता, जनसंचार की एक इकाई भर है सोशल मीडिया जनसंचार के स्वरूप को विस्तारित करती है. वह पूर्वाग्रह तोड़ती है और मीडिया को लोकतांत्रिक बनाती है. सोशल मीडिया एक यांत्रिक विकास की प्रक्रिया है जो पत्रकारिता के शास्वत मूल्य को बदल नहीं सकती.

लन्दन प्रवासी लोकप्रिय ब्लॉगर और लेखिका और स्वतंत्र पत्रकार श्रीमती शिखा वार्ष्णेय ने कहा कि “आज सोशल मीडिया कमाई का ज़रिया भी बन गया है. अगर आप अच्छा लेखन करते हैं तो उससे आर्थिक उपार्जन का रास्ता भी निकलता है. आपका लेखन मुख्यधारा में बड़े पैमाने पर कच्चे माल अर्थात सन्दर्भ सामग्री के तौर पर धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है. पत्रकारिता को किसी समय सीमा से बांधा नहीं जा सकता है”।

ब्लाग और सोशल मीडिया के जारिए अपनी बात कहने की आजादी किसी को कहीं भी है। सोशल मीडिया ऐसा मंच है जहाँ न केवल कार्यक्रम सीधे यूजर्स तक पहुँचते हैं बल्कि यूजर्स कार्यक्रमों में शामिल भी हो सकते हैं या अपनी राय प्रकट कर सकते हैं। उन्होने कहा कि इसे जागरूकता के साथ प्रयोग करने से एक सशक्त माध्यम बन सकता है। कोई भी माध्यम छोटा और बड़ा नहीं हो सकता।Social media can not be ignored 2

विज्ञान पत्रकारिता विभाग लखनऊ विश्वविद्यालय में अतिथि प्रवक्ता और डेक्कन हेराल्ड के विशेष संवाददाता संजय पाण्डेय ने बताया कि नया मीडिया आपको अभिव्यक्ति का एक आधार तो दे रहा है पर उसके कुछ संभावित खतरे हैं जिनका समाधान निकल पाना असंभव लगता है. भाषा, सामग्री के स्तर और किसी नियंत्रण या छन्नी का न होना चिंताजनक भी है. इस मौके पर आईबीएन-7 के राज्य ब्यूरो प्रमुख शलभमणि त्रिपाठी ने अपने वक्तव्य में कहा कि खबरों का कोई दायरा नहीं होता। अब तक जो दीवारें थीं वह गिर गईं. पत्रकरिता अब बंदिश नहीं है। हर आम आदमी पत्रकार है। इसमें सोशल मीडिया की अहम भूमिका रही है।

उन्होने कहा कि इंटरनेट का प्रयोग करने वाला लगभग हर व्यक्ति किसी न किसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स से जुड़ा है। यह अभिव्यक्ति क‍हा नया माध्यम भी है। अब पत्रकारिता किसी जागीर नहीं है। इसमें आजादी है। दुनिया में हर एक चीज दूसरे से जुड़ी है और निर्भरशील है। सोशल मीडिया को अब कोई नकार नहीं सकता है। हर दूसरा व्यक्ति सोशल मीडिया को जरूरी फॉलो करता है। बस इसका सकारात्मक प्रयोग ही अच्छी सफलता है। प्रसिद्ध लेखक और टिप्पणीकार शिवानंद द्विवेदी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि नया मीडिया कोई संगठन या एनजीओ नहीं बल्कि यह आम आदमी को अपनी बात कहने का एक सशक्त माध्यम देता है। इसके माध्यम से अपनी बात कहने का एक मंच प्राप्त होता है। इसके माध्यम से हर बात को सरल ढंग से प्रस्तुत कर सकते हैं. इसके जरिए से हम अपनी आजादी और बौद्धिक स्तर का सही प्रारूप प्रस्तुत कर सकते हैं। प्रथम सत्र का धन्यवाद प्रस्ताव नया मीडिया मंच के श्रीनिवास राय शंकर द्वारा प्रस्तुत किया गया.

‘वैकल्पिक पत्रकारिता और संभावनाओं का भविष्य’ विषयक दूसरे ओपन सत्र में मंच पर वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर ने अपने सम्बोधन में कहा कि नया मीडिया के तौर पर प्रचारित किये जा रहे सोशल मीडिया को कभी भी वैकल्पिक पत्रकारिता का स्थान नहीं मिल सकता है। कारण यह कि यह सूचनाओं का माध्यम तो बन सकता है और बहु-माइंडसेट वर्चुअल संयंत्र बन सकता है लेकिन अधिकतम और पर्याप्त सूचनाओं का माध्यम नहीं। प्रवक्ता.काम के संपादक संजीव सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि कहा कि मीडिया का काम केवल मनोरंजन करना और राजनीतिक खबरों तक ही सिमटकर नहीं रह जाना होता है, जैसा कि हमारा मुख्यधारा का मीडिया करता है अपितु जनता को शिक्षित करना, कला-संस्कृाति-साहित्यु पर बात करना, वृहत्तिर समाज का भी जायजा लेना उसका एक प्रमुख दायित्व है, और यह कार्य वर्तमान समय में नया मीडिया कर रहा है। इसके साथ ही मैंने कहा कि भारत ही नहीं पूरी दुनिया में यूक्रेन के ‘ऑरेंज रेवॉल्युाशन’ से लेकर न्यूयार्क के ‘अकुपाई वाल स्ट्रीट’ तक, ‘अरब स्प्रिंग’ से लेकर ‘अन्नाु आंदोलन’ तक, नया मीडिया राजनीतिक परिर्वतन और लोकतांत्रीकरण की प्रक्रिया को तेज कर रहा है। नया मीडिया पर संघी सक्रियता की आलोचना का मैंने प्रत्यु त्तार देते हुए कि अब तक मीडिया एक खास विचारधारा द्वारा पूर्वग्रह से ग्रस्त रहा है इसलिए अब जब नया मीडिया के माध्येम से जन-अभिव्यक्ति हो रही है तो उसे इसे संघी सक्रियता के नाम से खारिज करने का षड्यंत्र हो रहा है। मैंने सुरेश चिपलूकर, पंकज कुमार झा, रवि शंकर आदि का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे तमाम राष्ट्रमवादी सोशल मीडिया एक्टिविस्टों के स्टेमट्स पढ़े जाएं तो पता चलेगा कि कितनी जिम्मे दारीपूर्वक अपनी बात कही जा रही है।

वरिष्ठ लेखक और ब्लॉगर कश्यप किशोर मिश्र ने नया मीडिया की गंभीरता के बारे में बोलते हुए कहा कि सोशल मीडिया भी इसका अपवाद नहीं है । “शब्द ब्रम्ह है, शब्द रूद्र हैं” ऐसा ऋगवेद में कहा गया है, अर्थात शब्द सर्जक भी है और शब्द विनष्ट भी करता है, तो यह आप पर है, आप सोशल मीडिया का इस्तेमाल सृजन में करते हैं या विनाश में, आप इसका इस्तेमाल कंस्ट्रक्टिव और डिस्ट्रक्टिव दोनों तरीके से कर सकते हैं, आप इसका इस्तेमाल कैसे करते हैं, यह आपके सरोकार ही तय करेंगे ।

नई दिल्ली से आये लोकप्रिय सोशल मीडिया एक्टिविस्ट प्रवीण शुक्ल बटोही ने कहा कि नया मीडिया को बिना किसी पूर्वाग्रह के देखने और प्रयोग करने की जरूरत है. आप हमारी उपस्थिति से असहज और असहमत हो सकते हैं पर ख़ारिज अथवा नजरंदाज नहीं कर सकते. नया मीडिया मंच के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. धीरेन्द्र नाथ मिश्र ने सोशल मीडिया की भूमिकाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा की पाठ्य पुस्तकों में लम्बे समय से चल रहे अशुद्धियाँ और भ्रांतियाँ अब तर्कों द्वारा खंडित होने लगी हैं। अब लोग जस का पढ़ने के बजाय उस पर विमर्श करते हैं और यह नया मीडिया की वजह से संभव हुआ है। यह अंतिम पंक्ति के हर उस व्यक्ति का मंच है, जो वंचित हैं, शोषित है और न्याय की लड़ाई लड़ रहा है।Social media can not be ignored 1

इलाहाबाद से आमंत्रित वरिष्ठ पत्रकार और प्राध्यापक रनीश जैन ने सोशल मीडिया की तुलना सामाजिक पितृत्व से की जिसमें उन्होंने बताया कि हम इसके माध्यम से एक आभासी ही सही सामाजिक अभिभावक कि निर्मित कर रहे हैं जिससे हमे लगभग हरेक समस्या पर बेहतर सुझाव और मार्गदर्शन प्राप्त होता रहता है. लखनऊ के नंबर वन रेडियो जाकी प्रतीक मेहरा ने कहा कि आज रेडियो को भी समय के साथ चलना पड़ रहा है वह भी अब दिखना चाहता है. इसी दिखने की जद्दोजेहद ने उसको सोशल मीडिया का सहारा लेने पर मजबूर कर दिया है. आज हमारे लगभग सारे कार्यक्रम आन लाइन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं. इस सत्र में नया मीडिया के मिजाज के मुताबिक खूब विचारों का आदान-प्रदान हुआ। सवालों और जवाबों की झडि़या लग गईं। मुख्यजधारा के पत्रकारों ने नया मीडिया पर हमला बोलते हुए इसे कूड़ा-करकट बताया तो वेब मीडियाकर्मियों ने जोरदार शब्दों में नया मीडिया को जन-अभिव्‍यक्ति का सशक्तं माध्य म बताया।

कार्यक्रम को सफ़ल बनाने में राजधानी लखनऊ के विभिन्न विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और संस्थानों द्वारा संचालित पत्रकारिता के पाठ्यक्रम में अध्ययनरत तकरीबन 200 छात्रों ने प्रतिभाग किया. सभी प्रतिभागियों को आयोजन समिति की ओर से सहभागिता प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया. साथ ही लखनऊ में कार्यरत दर्जनों पत्रकार, जन संचारक, अधिवक्ता, प्राध्यापक, सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं एवं माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रिय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय छात्रों ने भी अपनी जीवंत उपस्थिति दर्ज कराई. इस राष्ट्रीय मीडिया विमर्श का संचालन और संयोजन अतुल मोहन सिंह, शिवानन्द द्विवेदी सहर, सह संयोजन श्री ओमशंकर पाण्डेय द्वारा किया गया.साथ ही कार्यक्रम के संरक्षण की भूमिका अदा कर रहे आईबीएन 7 के राज्य ब्यूरो प्रमुख शलभ मणि त्रिपाठी ने बताया की “नया मीडिया मंच” द्वारा अगला कार्यक्रम 17 मई को भोपाल में डा.सौरभ मालवीय( माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रिय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के सहायक प्राध्यापक) के संयोजन में किया जायेगा.

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