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बर्फ के नीचे से जीवित मिले जवान से मिले प्रधानमंत्री

soldier-found-alive-6-days-after-siachen-avalancheजम्मू – लगभग एक सप्ताह पहले दुनिया के सबसे ऊंचे रण क्षेत्र लद्दाख के सियाचिन में हिमस्खलन की चपेट में आए सेना के 10 जवानों में से एक चमत्कारिक रूप से जीवित मिला है। उसकी हालत गंभीर है। सेना की उत्तरी कमान के कमांडर ले. जनरल डी एस हुड्डा के अनुसार कल रात बचाव अभियान के दौरान लांस नायक हनुमन थप्पा कोपड जीवित पाए गए। वह पिछले छह दिनों से 25 फुट मोटी बर्फ की परत के नीचे दबे हुए थे। उनकी हालत गंभीर है। लेह स्थित आर्मी अस्पताल के डॉक्टर लगातार उनको बचाने की कोशिश कर रहे हैं। हनुमन थाप्पा को जल्द ही विमान से दिल्ली स्थित आरआर हास्पिटल ले जाया जाएगा।

गौरतलब है कि भयावह हादसे के बाद किसी के भी जिंदा बचे होने की उम्मीद नहीं थी। प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री से लेकर सेना प्रमुख तक ने इन बहादुरों को श्रद्धांजलि दे चुके थे। इलाज के लिए दिल्ली में स्थित सेना के आर एंड आर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस बहादुर सिपाही को दिल्ली में इलाज के लिए भर्ती कराये जाने की खबर के बाद इनसे मिलने अस्पताल पहुंचे। मोदी ने कहा कि हम ईश्वर से उनकी सलामती की कामना करते हैं। मोदी ने कहा कि उनकी बहादुरी की मिसाल देने के लिए शब्द काफी नहीं हैं। गौरतलब है कि रक्षा मंत्री भी थप्पा से मिलने शाम 5 बजे पहुंचेंगे।

हनुमन थाप्पा कर्नाटक में धारवाड़ जिले के रहने वाले हैं। थाप्पा की पत्नी ने कहा कि वो ये जानकर बहुत खुश हैं कि उनके पति जिंदा हैं। वो उन्हें देखना चाहती हैं। हिमस्खलन की चपेट में आए अन्य नौ जवानों में से और कोई जीवित नही मिला है। इन जवानों की चौकी लगभग एक सप्ताह पहले भारी हिमस्खलन की चपेट में आने के बाद बर्फ में लगभग 25 फुट से भी नीचे दब गई थी। इन्हें बचाने के लिए पहले दिन से ही बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया जा रहा था। इसके लिए सेना ने बर्फ काटने वाली भारी मशीनों और अत्याधिक उपकरणों की सहायता ली। इस घटना के तीन-चार दिन बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इन सभी 10 जवानों की शाहदत की जानकारी देते हुए शोक संदेश ट्वीट किया था।

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और सेना की तरफ से भी इनके शहीद होने की बात कही गई थी। लेकिन सेना ने अपना अभियान बंद नहीं किया था और दिन-रात चले इस अभियान में अंतत: उस समय सफलता हाथ लगी जब देर रात लांसनायक कोपड जीवित पाए गए। सेना ने यह बचाव अभियान काफी प्रतिकूल परिस्थितियों में शून्य से 25 डिग्री सेल्सियस नीचे के तापमान में चलाया।

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