shatrughan-sinhaपटना – बीजेपी से नाराज चल रहे ऐक्टर और राजनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा है कि बीजेपी में कुछ लोग उनसे डरते हैं । एक न्यूज़ चैनल से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें बीजेपी से नहीं बल्कि उनके खिलाफ काम कर रहे कुछ लोगों से परेशानी है।

बिहार में विधानसभा चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर 14 अप्रैल को हुई बीजेपी की रैली में शत्रुघ्न सिन्हा को नहीं बुलाया गया था और न ही उन्हें रैली के लिए लगाए गए बीजेपी के पोस्टरों में जगह मिली थी।

बीजेपी के पटना साहिब से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा का कहना था, ‘पार्टी में कुछ लोगों को मेरी पॉप्युलैरिटी में अपनी असुरक्षा का बोध होता है। उन्हें लगता है, मैं जाता हूं, छा जाता हूं। लोग मुझे ज्यादा मान-सम्मान देते हैं। मेरी बातें ज्यादा सुनते हैं। मेरी पावरफुल पर्सनैलिटी के सामने कुछ लोग छोटे हो जाते हैं। लेकिन, ये समझना चाहिए कि इससे भी अपनी ही पार्टी का भला हो रहा है। जो लोग इन बातों को नहीं समझते हैं, मैं उनकी सद्बुद्धि की कामना करता हूं।  

शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, ‘मेरे नाम का मतलब है शत्रुओं का दमन या नाश करने वाला। लेकिन मेरा कोई शत्रु नहीं है। मैं जियो और जीने दो की सोच लेकर आगे बढ़ना चाहता हूं, अपने आत्मसम्मान और आत्मविश्वास के साथ। अब लगता है कि उसमें कुछ लोगों के द्वारा मेरे साथ ज्यादती हो रही है। मैं पार्टी की कोई शिकायत नहीं कर रहा हूं। पार्टी मेरी अपनी है।

शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, ‘मैंने पहली और आखिरी बार बीजेपी जॉइन की है। मैंने कभी भी मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया है।’ आडवाणी खेमे के होने और साइडलाइन करने के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘ऐसा करना मुश्किल है। मैं मानता हूं कि मुसीबतों को वही पार कर सकता है, जिसमें क्षमता होती है। बिना किसी शिकायत और उम्मीद के मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो, बस मेरे आत्मसम्मान से खिलवाड़ मत करो।’

शत्रुघ्न सिन्हा ने आडवाणी और अटल बिहारी के साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि मोदी के मैजिक से ही बीजेपी पहली बार 272 के जादुई आंकड़े को पार किया। विरोधी दल के नेताओं के साथ मिलने पर उनका कहना था कि राजनीतिक में आपके विरोधी हो सकते हैं पर दुश्मन नहीं। उन्होंने कहा कि वह नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव, सोनिया गांधी, ज्योति बसु, राहुल गांधी, कांशीराम, मुलायम सिंह, मायावती सभी की कद्र करते हैं।

बीजेपी की पटना रैली में उम्मीद से कम भीड़ होने पर उनका कहना था, ‘हम लोग होते तो कुछ योगदान ही देते।’ जनता परिवार के विलय पर उन्होंने कहा, ‘विलय हुआ है या विलीन होगा, यह तो आने वाला वक्त बताएगा।’

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