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भगवान श्री गणेश को बहुत पसंद थे यें 5 मंत्र !

shree ganesh chalisaशास्त्रों के मुताबिक गणेश जी की दो पत्नियां ऋद्धि-सिद्धि व लाभ और क्षेम पुत्र बताए गए हैं। जिनको शुभ-लाभ भी कहा जाता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है तो उनकी पत्नियां ऋद्धि-सिद्धि यशस्वी, वैभवशाली और सम्मानित बनाने वाली होती है। इसी के साथ शुभ-लाभ हर सुख-सौभाग्य देते हैं और उसे स्थायी व सुरक्षित रखते हैं।

ऐसे ही सुख-सौभाग्य की चाहत पूरी करने के लिए बुधवार और चतुर्थी को गणेश पूजन में श्री गणेश के साथ ऋद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ का विशेष मंत्रों से ध्यान और पूजा बहुत ही फलदायी मानी गई है।

बुधवार को स्नान के बाद ऋद्धि-सिद्धि के साथ भगवान गणेश की मूर्ति को जल स्नान कराएं. इसके बाद उनके आस-पास शुभ-लाभ रूपी दो स्वस्तिक बनाएं. श्री गणेश और सभी को केसरिया चंदन लगाएं।

फिर चावल, दूर्वा चढ़ाएं और धूप-दीप जलाकर पूजा करें। अब नीचे लिखे अलग-अलग मंत्र बोलकर गणपति और उनके परिवार को फूल चढ़ाकर शुभ, मंगल कामनाएं करें –

पांच विशेष मंत्र:

श्री गणेश मंत्र:
ॐ गं गणपतये नम:

ऋद्धि मंत्र:
ॐ हेमवर्णायै ऋद्धये नम:

सिद्धि मंत्र:
ॐ सर्वज्ञानभूषितायै नम:

लाभ मंत्र:
ॐ सौभाग्य प्रदाय धन-धान्ययुक्ताय लाभाय नम:

शुभ मंत्र:
ॐ पूर्णाय पूर्णमदाय शुभाय नम:
पूजा और मंत्र ध्यान करने के बाद मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। इसके बाद आरती करके, प्रसाद बांटकर ग्रहण करें।






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