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NEET पर स्टे से SC का इंकार, कहा- हस्तक्षेप से भ्रम पैदा होगा

Supreme Courtनई दिल्ली- सर्वोच्च न्यायालय ने नेशनल एलिजीबिलटी कम इंट्रेंल टेस्ट (NEET) पर सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश के खिलाफ दायर की गई याचिका पर स्टे लगाने से इंकार कर दिया है। न्यायालय की ओर से कहा गया है कि यह मामला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के समक्ष जुलाई में रखा जाएगा। न्यायालय ने कहा है कि इस मामले में अंतरिम आदेश की आवश्यकता नहीं है। सरकार ने नीट को खारिज नहीं किया है बल्कि कुछ राज्यों को छूट दी है। अगर हम इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे तो यह भ्रम पैदा करेगा।

अब तक क्या क्या हुआ NEET में
11 अप्रैल 2016 को सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने साल 2013 के उस फैसले को वापस ले लिया, जिसमें एमबीबीएस, बीडीएस और परास्नातक कोर्स के लिए एकल संयुक्त प्रवेश परीक्षा आयोजित करने को संविधान के विरुद्ध बताया गया था।

27 अप्रैल 2016 : केंद्र सरकार व एमसीआई ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि वे एनईईटी इसी सत्र से कराने के लिए तैयार हैं

28 अप्रैल 2016 : सुप्रीम कोर्ट ने एक मई और 24 जुलाई को दो चरणों में एनईईटी आयोजित करने का आदेश दिया

16 मई 2016 : स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ बैठक कर उनकी राय जानी

19 मई 2016 : कैबिनेट ने नीट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को एक साल तक टालने के लिए अध्यादेश को दी मंजूरी

24 मई 2016: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अध्यादेश को मंजूरी दी

बता दें कि तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक आदि राज्यों ने एनईईटी का विरोध किया था। तमिलनाडु का कहना था वह दाखिले के लिए टेस्ट नहीं बल्कि मेरिट को आधार मानता है। ऐसे में यह लागू हुआ, तो 12वीं की परीक्षा देने वाले चार लाख छात्र इससे वंचित रह जाएंगे। इसी तरह तेलंगाना और आंध्र प्रदेश ने भी अपनी दलील पेश की। कर्नाटक ने कहा कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेज एसोसिएशन की तरफ से आठ मई को टेस्ट कराना निर्धारित था। इसकी तैयारियों पर आठ करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इसी तरह की दलीलें यूपी की ओर से भी दी गईं।

गौरतलब है कि नीट पर सरकार के अध्यादेश को चुनौती व्यापम घोटाले के व्हिसल ब्लोअर रहे डॉ. आनंद राय और मेडिकल छात्र संजीव शुक्ला ने बुधवार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। डॉ आनंद राय ने अपनी याचिका में केंद्र सरकार के अध्यादेश को गैरकानूनी बताया और कोर्ट से इसे निरस्त करने की मांग की है।

याचिका में कहा गया था कि नीट परीक्षा के लिए लाए गए सरकार का अध्यादेश जनहित के खिलाफ है। उन्होंने याचिका में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में अनियमितताओं और धांधली-भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए नीट परीक्षा आयोजित करने का आदेश दिया था।

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