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यहां के पंडा जानते है जहर उतारने का मंत्र

mandla madhya pradesh Snakeमंडला- आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले के ग्रामीण इलाकों में लोगों को नागपंचमी के पर्व का बड़ी बेसब्री से इन्तजार रहता है इस दिन गाँव के लोग पारम्परिक तरीके से नागदेवता की पूजा करते है, इस ख़ास पूजापाठ को पटा बैठालना कहा जाता है।

खास बात यह है कि सांप के काटने पर लोगों को उसका जहर उतारने का मन्त्र भी सिखाया जाता है। मंडला जिले के बिनैका गाँव में यह परम्परा वर्षों से चली आ रही है गाँव में बच्चे बूढ़े और महिलाएं एक स्थान में एकत्र हो जाते है और गाने बजाने के साथ नागदेवता की आराधना करते है।

कुछ ही समय के बाद भीड़ में कुछ लोगों पर नागदेवता की सवारी आ आती है। स्थानीय लोग यह भी दावा करते है कि आज के दिन सांप काटने का जहर उतारने का मन्त्र सीखने वाले को ऐसी शक्ति प्राप्त होती है जो जहरीले सांप के काटे हुये इंसान को पल भर में ठीक कर सकता है। यही बजह है कि इस गाँव में आज बच्चे से लेकर बूढों तक सांप का जहर उतारने का मन्त्र जानते है। इस गाँव में दूर दूर से सर्प दंश के शिकार मरीजों को आना होता है।

नागपंचमी नागदेवता के उपासना का पर्व है। मंडला के बिनैका गाँव में तंत्र-मंत्र के जरिये यह पर्व पारंपरिक तरीके से मनाई जाती है। नागदेवता के उपासक एक साँपनुमा लकड़ी की पूजापाठ करते हैं फिर एक गीत गाया जाता है जिसे ग्रामीण अखाड़ी पाठ कहते हैं।

अखाड़ी पाठ करते समय नाग उपासकों में कुछ लोगों में नागदेवता सवार हो जाते हैं और वे लोग किसी नाग की तरह भाव खेलने लगते हैं। इसी दौरान नाग का रूप धारण किये लोग सर्पदंश के शिकार पीड़ित लोगों का जहर उतारने का काम करते हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो यह पूजा वास्तविक में आस्तिक मुनि की पूजा है जिससे नाग देवता प्रसन्न रहते हैं।

सांप के जैसे लोटते चलते यह नाग उपासक समय समय पर सर्प की तरह फुफकार भी मारते हैं। नाग उपासक गोपाल बाबा का दावा है कि सर्प काटा व्यक्ति यदि उनके पास आ जाये तो उनकी जान बचायी जा सकती है साथ ही इनका कहना है कि अबतक कई लोगों की जान बचायी जा चुकी है।

नागपंचमी के दिन जिले के कई गाँवों में ऐसी पारंपरिक पूजा पाठ होती है लेकिन चिकित्सा विज्ञान से जुड़े लोग इसे अंधविश्वास मानते हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. के.सी.मेश्राम, मंडला का कहना है कि सर्पदंश से पीड़ित लोगों को तत्काल अस्पताल पहुँचाया जाना चाहिए।

ग्रामीण इलाकों में फैले अंधविश्वास के चलते सांप काटने पर लोग ओझा और पंडों के चक्कर में पड़ जाते हैं और इलाज़ के अभाव में वह दम तोड़ देते हैं।

रिपोर्ट :- @सैयद जावेद अली






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