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255 राजनैतिक पार्टी की मान्यता रद्द, यूपी में 41 पार्टियां फ़र्ज़ी

election-commissionलखनऊ– इसे मोदी सरकार का भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी युद्ध में अब तक का सबसे बडा एक्शन कहा जा रहा है। चुनाव आयोग ने 255 राजनैतिक पार्टी की मान्यता रद्द कर दी है। इन पार्टियो ने 2005 से अब तक यानि 2015 तक एक भी चुनाव नहीं लड़ा। इन सभी राजनैतिक पार्टियो के आज तक के सभी लेनदेन की सघन जाँच होगी।

ये मोदी की भारत से भ्रष्टाचार के खात्मे की प्रबल इच्छा शक्ति की साफ झलक है। हद तो तब हो गई जब एक पार्टी 17 अकबर रोड, नई दिल्ली के पते पर रजिस्टर पाई गई, जो भारत सरकार के गृह मंत्री राजनाथ सिंह का आवास है।

इसी तरह एक और पार्टी का पता जम्मू कश्मीर का CID मुख्यालय के नाम पर निकला। मान्यता रद्द होने वाली पार्टियो में नंबर एक दिल्ली है, यहाँ रजिस्टर 52 पार्टिया फ़र्ज़ी पाई गई। दूसरे नम्बर पर यूपी है यहाँ 41 पार्टिया फ़र्ज़ी पाई गई।

वहीं, चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि सीबीडीटी इन 255 फर्जी राजनीतिक दलों के अकाउंट की जांच करे। अब 255 पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों के वित्तीय ब्योरे की जांच की जाएगी।

कुल फर्जी राजनीतिक दलों में सबसे ज्‍यादा 52 पार्टियां दिल्‍ली से रजिस्‍टर्ड है। ऐसे ही एक फर्जी दल का पता 17, अकबर रोड नई दिल्‍ली पंजीकृत है। वहीं, एक पार्टी जम्‍मू कश्‍मीर के सीआईडी के कार्यालय के पते पर रजिस्‍टर्ड है। उत्‍तर प्रदेश से 41, तमिलनाडु से 30, महाराष्‍ट्र से 24 फर्जी दल सामने आए हैं। इन 255 दलों ने 2005 से 2015 तक कोई चुनाव नहीं लड़ा है। आयोग की इस कार्रवाई के बाद फर्जी राजनीतिक दलों को अब अन्‍य मान्‍यता प्राप्‍त की तरह टैक्‍स छूट नहीं मिलेगी।

इससे पहले, चंदों के गलत इस्तेमाल की आशंका के कारण चुनाव आयोग ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) को निर्देश दिया है कि वह ऐसी 255 पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों के वित्तीय ब्योरे की जांच करे जिन्हें आयोग ने पिछले एक दशक से चुनाव ना लड़ने के कारण इस साल असूचीबद्ध कर दिया था। सीबीडीटी के अध्यक्ष को गुरुवार लिखे एक पत्र में आयोग ने कहा कि उसने इस साल फरवरी और 15 दिसंबर के बीच 255 पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों को असूचीबद्ध कर दिया था। साल 2005 और 2015 के बीच चुनाव ना लड़ने के कारण इन पार्टियों को असूचीबद्ध कर दिया गया था।

आयोग ने कहा कि जांच करने पर चुनाव मशीनरी ने पाया कि कुछ पार्टियां ‘अब अस्तित्व में हैं ही नहीं या काम नहीं कर रहीं।’ चुनाव आयोग ने सीबीडीटी से कहा है कि यदि पार्टियों को कानून का उल्लंघन करते पाया जाए तो जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 29-बी और 29-सी के प्रावधानों के मद्देनजर ‘जरूरी कार्रवाई’ की जाए। धारा 29-बी के तहत यदि कोई व्यक्ति या कंपनी, सरकारी कंपनी को छोड़कर, किसी राजनीतिक पार्टी को स्वेच्छा से कितनी भी रकम की पेशकश करे तो हर राजनीतिक पार्टी ऐसे चंदे को स्वीकार कर सकती है।

धारा 29-सी के तहत किसी राजनीतिक पार्टी का कोषाध्यक्ष या पार्टी की ओर से अधिकृत व्यक्ति हर वित्तीय वर्ष में ऐसे चंदों पर एक रिपोर्ट तैयार करेगा जिसमें किसी व्यक्ति ने 20,000 रूपए से ज्यादा की रकम दी हो, और जिसमें किसी कंपनी, सरकारी कंपनी को छोड़कर, ने 20,000 रूपए से ज्यादा की रकम दी हो। आयोग के पास किसी राजनीतिक पार्टी को पंजीकृत करने का अधिकार तो है, लेकिन चुनावी कानूनों के तहत उसके पास किसी पार्टी को अपंजीकृत करने का अधिकार नहीं है। किसी पार्टी को अपंजीकृत करने का अधिकार दिए जाने की आयोग की मांग कानून मंत्रालय में लंबित है। हालांकि, आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल कर निष्क्रिय हो चुकी और लंबे समय से चुनाव नहीं लड़ने वाली पार्टियों को असूचीबद्ध किया है।

देश में 1780 से ज्यादा पंजीकृत, लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियां हैं। इसके अलावा, सात राष्ट्रीय पार्टियां हैं जिनमें भाजपा, कांग्रेस, बसपा, तृणमूल कांग्रेस, भाकपा, माकपा और एनसीपी शामिल हैं। देश में 58 राज्य स्तरीय पार्टियां हैं।
रिपोर्ट- @शाश्वत तिवारी




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