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गौरक्षकों के डर से बीमार गायों का इलाज कराना हुआ मुश्किल

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में गौरक्षकों का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि बीमार गायों को इलाज कराना भी गाय मालिकों को डराने लगा है। दरअसल, गौरक्षकों की गुंडागर्दी की वजह से अब कोई ट्रांसपोर्टर बीमार गायों को अस्पताल तक पहुंचाने को भी राजी नहीं है। ऐसा ही एक मामला सोमवार को सामने आया है. मेरठ की रहने वाली ज्योति ठाकुर को अपनी गाय (मोनी) को इलाज के लिए बरेली स्थित आईवीआरआई तक पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक को ट्वीट करना पड़ा।

हालांकि वहां भी मदद की गुहार नहीं सुनी गई, लेकिन मामला स्थानीय मीडिया में आने के बाद मेरठ की एसएसपी (वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक) ने इस मामले पर संज्ञान लिया। उन्होंने पुलिस टीम के साथ उस लड़की और उसकी गाय को बरेली पहुंचवाया।

अपनी गाय ‘मोनी’ के साथ बरेली के भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान केंद्र (आईवीआरआई या IVRI) पहुंची मेरठ निवासी ज्योति ठाकुर के अनुसार कुछ समय पहले मोनी के पैरों में पैरालिसिस की शिकायत हो गई थी। इस वजह से वह खड़ी भी नहीं हो पा रही थी।

मेरठ में जानवरों के कई डॉक्टरों को दिखाने पर भी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। ज्योति का कहना है कि वह ‘मोनी’ से बहुत प्यार करती है, क्योंकि वह बचपन से ही उसके साथ है।

मोनी की हालत देखते हुए डॉक्टरों ने उसे IVRI लाने का सुझाव दिया। इसके बाद ही असली दिक्क्त शुरू हुई। ज्योति ठाकुर ने मोनी को ले जाने के लिए प्राइवेट वाहन चालकों से लेकर ट्रांसपोर्टरों तक से बात की। उसकी तमाम कोशिशों के बाद भी कोई भी ‘मोनी’ को बरेली तक लाने के लिए तैयार नहीं हुआ।

बताया गया है कि गाय को ले जाने के नाम से सभी वाहन मालिक डर रहे हैं, कारण पूछने पर वह कहते थे कि “गोरक्षकों से कौन पिटेगा… वे आपकी मजबूरी नहीं पूछते, सीधे मारना-पीटना शुरू कर देते हैं…”।

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