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राज्य मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक पर अवैध निर्माण कराने का आरोप

अमेठी: सत्ता प्रतिष्ठान से जुड़े लोगों, राजनीतिज्ञों और उनके परिजनों से आशा की जाती है कि वे कोई भी कानून विरोधी कार्य नहीं करेंगे और स्वयं को सच्चा जनसेवक सिद्ध करते हुए आम लोगों की मुश्किलें सुलझाने में मदद करेंगे। परंतु आज एक विधायक एवं राज्यमंत्री पर पद व रसूख का इस्तेमाल अवैध निर्माण में सहयोग करने का गम्भीर आरोप लगा है ।

प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति से साथ न्याय की बात कही थी। जिसके बाद आम आदमी को योगी जी से काफी ज्यादा उम्मीदें हो चुकी हैं। लेकिन अब स्थानीय विधायक एवं राज्यमंत्री पर अमेठी में जमीन अवैध निर्माण करने का गम्भीर आरोप लग रहा हैं।

क्या है मामला-

दरअसल अमेठी के शुकुल बाजार थाना क्षेत्र अंतर्गत रहने वाले हीरालाल सुत राम दयाल निवासी जलाली ने मुख्यमंत्री को लिखे एक पत्र में आरोप लगाया है, कि उसने और चचेरे भाई बाबादीन के साथ मिलकर अपने घर के बगल मकान एवं सहन को अपने गाँव के ही निवासी पचई से 2 अगस्त 1987 को खरीदा था और तभी से उक्त जमीन पर कब्जा दाखिल है। हम इस जमीन का उपयोग जानवर बांधने लकड़ी रखने में कर रहे थे। लेकिन इस जमीन पर एक मंत्री के रिश्तेदार बिन्द्रा प्रसाद की नियत कब्जा करने की थी।

आरोप है कि इसी के चलते मंत्री के निर्देश पर एसओ शुकुल बाजार ने 17 अगस्त 2017 को मेरे और लड़के को थाने में बैठा कर दूसरे दिन जमीन पर निर्माण शुरु कर दिया। निर्माण रुकवाने के लिए हीरालाल ने जनपद के उच्चाधिकारियों के कार्यालयों चक्कर काट फ़ोन से सूचित किया। जिसके बाद जिलाधिकारी अमेठी एवं उपजिलाधिकारी मुसाफिरखाना ने लिखित स्थगन का आदेश दिया। स्थगन आदेश के बावजूद भी विपक्षी गण उक्त जमीन पर अवैध निर्माण कर रहे है ।

‘मित्र पुलिस’ को ही बताया अपनी ‘जान का दुश्मन’-

हीरालाल ने आरोप लगाया कि उसे शुकुल बाजार पुलिस से जान का खतरा है और पुलिस उसे फर्जी मुकदमे में फसा सकती है। यही नही हीरालाल ने बताया कि पुलिस ने हमे 36 घंटे तक बिना कारण थाने पर बिठाये रखा ।और इसी दौरान विपक्षी गण ने अपना निर्माण कार्य जारी रखा ।

मामला चाहे जो भी लेकिन यह गलत परम्परा को जन्म देने वाला एक खतरनाक रुझान है। यदि इसे नहीं रोका गया तो आम लोग भी प्रतिक्रिया स्वरूप इनकी ही तरह कानून अपने हाथ में लेने को विवश होंगे और इसका नतीजा सभी पक्षों के लिए दुखद ही होगा। अत: ऐसे गम्भीर आरोपो को सरकार और प्रशासन द्वारा नोटिस में लेकर दूध का दूध और पानी का पानी करना ही चाहिए। ताकि दोषियों को सजा मिले और देश एवं समाज के लिए हानिकारक खतरनाक रुझान को और बढऩे से रोका जा सके।

रिपोर्ट@राम मिश्रा

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