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क्या योगी के अयोध्या से हार गया मोदी का काशी?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्यावासियों के लिए छोटी दिवाली को विशेष बना दिया है। सीएम योगी आदित्यनाथ सरयू तट पर राम की पैड़ी पहुंचे, जहां उनके साथ लोगों ने 1 लाख 87 हजार 213 दीये जलाकर नया रिकॉर्ड कायम किया।

इस मौके पर अयोध्या में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। वहीं इस आयोजन से उत्तर प्रदेश में निश्चित ही एक नई परंपरा की शुरुआत हो चुकी है। इससे पहले राज्य में काशी के तट पर होने वाली देव दीपावली का ही महत्व था। जहां दिवाली के 15 दिन बाद लाखों दीये गंगा के तट पर जलाए जाते रहे हैं। ऐसे में योगी की इस नई कोशिश से यह सवाल उठने लगा है कि क्या योगी के अयोध्या के आगे मोदी के काशी की चमक फीकी पड़ गई है?

काशी की पहचान रही है देव दीपावली

कार्तिक पूर्णिमा के दिन काशी में मनाई जाने वाली देव दीपावली देश-विदेश में प्रसिद्ध है। इस दिन महादेव की नगरी में 84 घाटों को असंख्य दीपों से सजाया जाता है। एक अनुमान के अनुसार इस दिन शहर के विभिन्न घाटों और मंदिरों में लगभग 1.25 लाख दीये जलाए जाते हैं। ऐसे में अगर सरयू तट पर हुए योगी आदित्यनाथ की छोटी दिवाली के आयोजन से इसकी तुलना करें तो देव दीपावली की चमक कम नजर आती है।

आपको बता दें कि अयोध्या में इस बार 1 लाख 87 हजार 213 दीये रोशन किए गए। हालांकि दीये बनाने वाले विनोद प्रजापति ने बताया कि 2 लाख दीयों का ऑर्डर दिया गया था। एक दीये में 50 ग्राम तेल डाला गया था।

आरती की चमक से जगमग हुआ सरयू का तट

एक तरफ जहां सरयू तट पर 5100 दीयों से नदी की आरती की गई। 15 मिनट तक मां सरयू का पूजन और अभिषेक किया गया। इसमें सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी शि‍रकत की। वहीं इस आयोजन की काशी में होने वाले गंगा की महाआरती से तुलना हो रही है। दशाश्वमेध घाट पर देव दीपावली के दिन होने वाली खास आरती के बारे गंगा सेवा निधि‍ के पीआरओ ने शि‍वम ने बताया कि इस 21 ब्राह्मण 1071 दीयों के साथ मां गंगा की महा आरती करते हैं। उनके साथ 42 कन्याएं ऋद्धि-सिद्धि के रूप में रहती हैं।

शिवम ने बताया कि काशी में 15 नवंबर, 1997 को दशाश्वमेध घाट पर संगीतमय आरती की शुरुआत हुई थी। धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता बढ़ती ही चली गई। बनारस में रोजाना विधि-विधान से भव्य आरती का आयोजन होता है। खासकर देव दीपावली के दिन यह आरती काफी खास होती है। मंत्रोच्चार, शंखों और घंटियों की आवाज के बीच आरती का नजारा बेहद अद्भुत होता है। इसमें कई बड़ी और नामचीन हस्तियां भी इसमें शामिल होती हैं। उन्होंने बताया कि इस साल भी 4 नवंबर को इस आयोजन की खास तैयारी की गई है। इस आयोजन में यूपी की पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी और केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा शामिल हो सकते हैं।

सरयू की छोटी दीपावली का महत्व

सीएम योगी आदित्यनाथ ने देश में राम राज्य की स्थापना का संकल्प लेते हुए सरयू तट पर इस छोटी दीपावली का आयोजन किया है। अपने भाषण में योगी ने कहा कि PM मोदी के नेतृत्व में देश सशक्त बन रहा है, राम-राज्य की परिकल्पना को हम साकार करेंगे। साथ ही योगी इस आयोजन के बहाने अयोध्या के विकास का सपना भी संजो रहे हैं। यही वजह है कि उन्होंने घोषणा की कि अयोध्या में 113 करोड़ की योजनाएं शुरू हो रही हैं। इस आयोजन को भव्यता प्रदान करने के लिए योगी खुद भगवान राम, सीता और लक्ष्मण को लेकर रामकथा पार्क पहुंचे।

काशी का योगी से उम्मीद, देव दीपावली भी बनेगी खास

कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुर नामक दैत्य का वध किया और अपने हाथों बसाई काशी के अहंकारी राजा दिवोदास के अहंकार को नष्ट कर दिया। राक्षस के मारे जाने के बाद देवताओं ने स्वर्ग से लेकर अपनी नगरी काशी तक दीप जलाकर खुशी मनाई। देवगण उत्सव होने के कारण इसे देव दीपावली नाम दिया गया। तभी से इस पर्व को कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर काशी के घाटों पर दीप जलाकर मनाया जाने लगा।

वर्तमान में देव दीपावली की छटा देखने लाखों विदेशी और देसी पर्यटक काशी पहुंचते हैं। शिवम ने बताया कि माना जाता है कि देव दीपावली के दौरान गंगा आरती देखने से मोक्ष मिलता है। योगी के अयोध्या कार्यक्रम के बारे में शि‍वम ने कहा कि इससे काशी के महत्वता पर कोई कमी नहीं पहुंचने वाली। हालांकि उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ से उम्मीद जताई कि वह अयोध्या जैसी कोशिश काशी से भी करें और काशी से भी राम राज्य की स्थापना का संदेश दें।

@एजेंसी

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